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    महबूबा मुफ्ती को आतंकवादी कहने पर भाजपा नेता गिरिराज पर भड़की पीडीपी, कहा- 'ये बयान गैरजिम्मेदाराना और भड़काऊ'

    By Naveen NawazEdited By: Rahul Sharma
    Updated: Wed, 05 Aug 2026 12:27 PM (IST)

    केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह द्वारा महबूबा मुफ्ती को 'आतंकवादी' कहने पर जम्मू-कश्मीर की सियासत में जुबानी जंग तेज हो गई है। ...और पढ़ें

    महबूबा मुफ्ती पर गिरिराज सिंह की टिप्पणी से सियासी बवाल पीडीपी ने बताया गैरजिम्मेदाराना।

    महबूबा मुफ्ती पर गिरिराज सिंह की टिप्पणी से सियासी बवाल पीडीपी ने बताया गैरजिम्मेदाराना

    HighLights

    1. गिरिराज सिंह ने महबूबा मुफ्ती को 'आतंकवादी' कहा।

    2. पीडीपी ने बयान को 'गैरजिम्मेदाराना और भड़काऊ' बताया।

    3. लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखने की अपील की गई।

    राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की सियासत में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। केंद्र में मंत्री और भाजपा के फायरब्रांड नेता गिरिराज सिंह द्वारा पीडीपी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को लेकर की गई टिप्पणी पर सियासी पारा चढ़ गया है।

    पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने बुधवार को इस टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए इसे 'गैरजिम्मेदाराना' और 'भड़काऊ' करार दिया है। सवाल ये है कि क्या एक केंद्रीय मंत्री को एक पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष की बड़ी नेता के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना शोभा देता है?

    इस तरह भड़का मामला

    दरअसल, बेगूसराय में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने महबूबा मुफ्ती को आतंकियों का सरपरस्त और समर्थन करने वाली नेता बताया था। उनके इस बयान के बाद जम्मू-कश्मीर समेत देशभर में इसकी चर्चा तेज हो गई। भाजपा नेता अक्सर महबूबा मुफ्ती के बयानों को पाकिस्तान परस्त बताते रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने सीधे उन्हें 'आतंकवादी' कह दिया, जिस पर पीडीपी ने कड़ा ऐतराज जताया है।

    पीडीपी ने आज एक आधिकारिक बयान जारी किया। पार्टी ने कहा कि केंद्रीय मंत्री द्वारा महबूबा मुफ्ती को 'आतंकवादी' कहना न केवल उनके पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के भी खिलाफ है।

    पार्टी प्रवक्ता ने कहा, 'हम राजनीतिक मतभेदों को समझते हैं, विचारधारा की लड़ाई लोकतंत्र की खूबसूरती है, लेकिन जब मतभेद व्यक्तिगत हमले और गाली-गलौज में बदल जाएं तो यह लोकतंत्र को कमजोर करता है।' पीडीपी का सीधा कहना है कि राजनीतिक मतभेदों का समाधान व्यक्तिगत टिप्पणियों के बजाय बहस और संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए।

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    लोकतंत्र की मर्यादा का उल्लंघन है

    पीडीपी ने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान सार्वजनिक विमर्श के स्तर को गिराने का प्रयास हैं। सोचिए, जब देश के एक जिम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति ही ऐसी भाषा का इस्तेमाल करेगा तो आम कार्यकर्ता और जनता में क्या संदेश जाएगा? क्या इसी तरह हम नए भारत में स्वस्थ लोकतंत्र की कल्पना कर रहे हैं?

    आपको याद होगा, इससे पहले भी गिरिराज सिंह और महबूबा मुफ्ती के बीच कई बार तीखी बहस हो चुकी है। चाहे अनुच्छेद 370 का मुद्दा हो, हिजाब विवाद हो या अफगानिस्तान के हालात पर टिप्पणी, दोनों नेता एक-दूसरे पर हमला बोलते रहे हैं। लेकिन इस बार मामला सिर्फ बयानबाजी से आगे बढ़कर एक महिला नेता की गरिमा और एक पूर्व मुख्यमंत्री के सम्मान से जुड़ गया है।

    पीडीपी ने अपने बयान में सभी राजनीतिक नेताओं से अपील की है कि सार्वजनिक बयान देते समय संयम बरतें और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखें। पार्टी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग पहले से ही कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं, ऐसे में उन्हें भड़काऊ बयानों की नहीं, बल्कि विकास और अमन-चैन की बातों की जरूरत है।