श्रीनगर की मस्जिद में कत्ल का 5 साल बाद इंसाफ, प्रतिबंधित TuM के पूर्व प्रमुख कमांडर गजाली के हत्यारे को उम्रकैद
श्रीनगर की जिला अदालत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन टीयूएम के पूर्व प्रमुख कमांडर अब्दुल गनी डार उर्फ गजाली के हत्यारे गुलाम मोहि-उद-दीन डार को आजीवन कारा ...और पढ़ें

श्रीनगर मस्जिद हत्याकांड: गजाली के हत्यारे को उम्रकैद, पांच साल बाद मिला इंसाफ।
HighLights
गजाली के हत्यारे को श्रीनगर कोर्ट ने उम्रकैद सुनाई।
दोषी गुलाम मोहि-उद-दीन डार पर 50 हजार जुर्माना भी।
पीड़ित परिवार को 7 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-उल-मुजाहिदीन(टीयूएम) के पूर्व प्रमुख कमांडर अब्दुल गनी डार उर्फ अब्दुल्ला गजाली उर्फ गजाली के हत्यारे गुलाम मोहि-उद-दीन डार शुक्रवार को श्रीनगर की जिला एवं सत्र अदालत ने आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
आपको बता दें कि अब्दुल गनी डार उर्फ अब्दुल्ला गजाली की 13 फरवरी 2020 को श्रीनगर के गवकदल स्थित मरकजी अहले हदीस मस्जिद में हत्या कर दी गई थी। इस संदर्भ में श्रीनगर के मैसूमा थाने में एफआईआर संख्या 03/2020 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के अंतर्गत दर्ज किया गया था।
अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए तथ्यों और सुबूतों के आधार पर अदालत ने पांच अगस्त 2026 को आरोपित गुलाम मोहि-उद-दीन डार, निवासी बुच्छवारा, डलगेट (श्रीनगर), को रस्सु डगाम निवासी अब्दुल गनी डार की हत्या का दोषी करार दिया और और आज उसे सजा सुनाई। सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि अपराध गंभीर और जघन्य है, लेकिन यह मामला 'दुर्लभतम से दुर्लभ' श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता। अदालत ने दोषी को उम्रकैद की कठोर सजा सुनाई और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
श्रीनगर कोर्ट ने कहा - ये पवित्रता पर हमला
अदालत ने निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि वसूल होने पर इसे मृतक के कानूनी उत्तराधिकारियों को मुआवजे के रूप में दिया जाए। साथ ही, कानून के अनुसार न्यायिक हिरासत में बिताई गई अवधि का लाभ भी दोषी को दिया गया। अदालत ने मस्जिद जैसे धार्मिक स्थल के अंदर हुई हत्या पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि पूजा स्थल में हिंसा सार्वजनिक शांति, सामाजिक सौहार्द और धार्मिक संस्थानों की पवित्रता को प्रभावित करती है।
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मृतक के परिवार की आर्थिक स्थिति और बच्चों की निर्भरता को देखते हुए अदालत ने जम्मू-कश्मीर पीड़ित मुआवजा योजना, 2019 के तहत 7 लाख रुपये की सहायता राशि जारी करने का भी निर्देश दिया। यह राशि जम्मू-कश्मीर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से पीड़ित परिवार को उपलब्ध कराई जाएगी।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में दोषसिद्धि गहन जांच और प्रभावी अभियोजन के आधार पर हुई। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, वैज्ञानिक एवं फोरेंसिक साक्ष्य, बरामदगी और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को अदालत के समक्ष पेश किया गया, जिनके आधार पर आरोपी की संलिप्तता साबित हुई।
एक ही मस्जिद, दो कत्ल और 15 साल का इतिहास
श्रीनगर पुलिस ने कहा कि यह फैसला पेशेवर जांच, वैज्ञानिक साक्ष्यों और प्रभावी अभियोजन के माध्यम से न्याय सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पुलिस ने दोहराया कि कानून का शासन बनाए रखना और अपराधियों को न्याय के दायरे में लाना उसकी प्राथमिकता है।
आपको जानकारी हो कि अब्दुल गनी डार उर्फ अब्दुल्ला गजाली का नाम इससे पहले 2011 में अहले हदीस नेता मौलाना शोकत शाह की हत्या के मामले में भी सामने आया था। मौलाना शोकत शाह की हत्या 8 अप्रैल 2011 को उसी मस्जिद परिसर में साइकिल बम विस्फोट में हुई थी। पुलिस जांच में विभिन्न संदिग्धों और संगठनों के बीच आपसी विवादों के पहलुओं की भी जांच की गई थी।