ऊधमपुर के शिवगली टॉप में मां चंडी के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब, पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने की खरीदारी
ऊधमपुर के शिवगली टॉप स्थित मां चंडी मंदिर में वार्षिक मेले में हजारों श्रद्धालुओं ने माथा टेका। यह मेला धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति का अद्भुत संगम र ...और पढ़ें

मां चंडी के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब। फोटो जागरण
HighLights
हजारों श्रद्धालुओं ने मां चंडी मंदिर में आशीर्वाद प्राप्त किया।
पारंपरिक छड़ी यात्रा और विशाल लंगर मेले के मुख्य आकर्षण।
स्थानीय लोक कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर मन मोहा।
जागरण संवाददाता, ऊधमपुर। डूडू-बसंतगढ़ क्षेत्र के शिवगली टॉप स्थित ऐतिहासिक मां चंडी मंदिर में सोमवार को आयोजित वार्षिक मेले में हजारों श्रद्धालुओं ने माथा टेककर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया। घने जंगलों और प्राकृतिक वादियों के बीच बसे इस पवित्र धाम में धार्मिक आस्था के साथ लोक संस्कृति की रंगत भी देखने को मिली। पारंपरिक छड़ी यात्रा, विशाल लंगर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मेले को विशेष आकर्षण प्रदान किया।
मां चंडी मंदिर में सोमवार को आयोजित वार्षिक मेले में धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस प्राचीन मंदिर में डूडू, बसंतगढ़, रामनगर, उधमपुर, जम्मू, भद्रवाह तथा आसपास के अनेक क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने मां चंडी के दरबार में माथा टेककर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
धार्मिक परंपरा क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत
मेले में रामनगर के विधायक डा. सुनील भारद्वाज ने भी पहुंचकर मां चंडी की पूजा-अर्चना की और क्षेत्रवासियों को वार्षिक मेले की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने मेले के आयोजन में जुटे स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों के प्रयासों की सराहना करते हुए इस धार्मिक परंपरा को क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत बताया।
वार्षिक मेले का शुभारंभ पारंपरिक छड़ी यात्रा के साथ हुआ।
भद्रवाह से मुख्य पुजारी के नेतृत्व में निकली माता की पवित्र छड़ी शनिवार शाम रामनगर के भगवान नरसिंह मंदिर पहुंची, जहां रात्रि जागरण का आयोजन किया गया। रविवार सुबह श्रद्धालुओं के जयकारों और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच छड़ी यात्रा भगवान नरसिंह मंदिर से शिवगली टॉप के लिए रवाना हुई।
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दोपहर में यात्रा मां चंडी मंदिर पहुंची, जहां विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। सोमवार को विधि-विधान के साथ पूजा के बाद पवित्र छड़ी को वापस भद्रवाह के लिए रवाना किया गया।
पूजा-अर्चना के बाद खरीदारी का भी लिया भरपूर आनंद
मेला परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशाल लंगर की व्यवस्था की गई, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इसके अलावा मेले में मिठाइयों, खिलौनों, फलों, घरेलू उपयोग की वस्तुओं तथा स्थानीय उत्पादों की अनेक दुकानें आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना के बाद खरीदारी का भी भरपूर आनंद लिया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मेले की रौनक को और बढ़ा दिया। स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक भद्रवाही 'कुड' नृत्य, पहाड़ी एवं भद्रवाही लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों की गूंज के साथ उनका उत्साहवर्धन किया। धार्मिक वातावरण के बीच लोक संस्कृति की यह झलक मेले का प्रमुख आकर्षण रही।