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    जम्मू-कश्मीर: बैसाखी पर मचैल माता मंदिर के कपाट खुलते ही बना रिकॉर्ड, पहले दिन पहुंचे 10 हजार से अधिक श्रद्धालु

    Updated: Tue, 14 Apr 2026 09:32 PM (IST)

    तीन महीने के अंतराल के बाद बैसाखी पर माता चंडी मचैल वाली के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। पहले ही दिन 10,000 से अधिक भक्तों ने दर्शन क ...और पढ़ें

    माता चंडी मचैल वाली के कपाट खुले (जागरण)

     माता चंडी मचैल वाली के कपाट खुले (जागरण)

    HighLights

    1. तीन महीने बाद बैसाखी पर खुले मचैल माता मंदिर के कपाट।

    2. पहले दिन 10,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन कर बनाया रिकॉर्ड।

    3. सड़क सुविधा के विस्तार से भक्तों की संख्या में भारी वृद्धि।

    जागरण संवाददाता, किश्तवाड़। तीन महीने के अंतराल के बाद माता चंडी मचैल वाली के दरबार के कपाट खुलते ही श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। कपाट खुलने के पहले ही दिन पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड टूट गए और 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने माता के चरणों में माथा टेककर पुण्य प्राप्त किया।

     

    बैसाखी पर खुले कपाट

    मकर संक्रांति (लोहड़ी के अगले दिन) को माता के कपाट बंद किए गए थे। तीन महीने बाद मंगलवार को बैसाखी के शुभ अवसर पर मंदिर के द्वार पुनः खोल दिए गए। सुबह मंदिर की साफ-सफाई और विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद मुख्य पुजारी ने श्रद्धालुओं को दर्शन करवाए।

    इस अवसर पर जम्मू संभाग के डिविजनल कमिश्नर रमेश कुमार और डीसी किश्तवाड़ पंकज कुमार शर्मा भी मंदिर पहुंचे। उन्होंने कपाट खुलते ही माता के दरबार में हाजिरी लगाई। अधिकारियों के प्रस्थान के बाद स्थानीय लोगों द्वारा पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जो काफी देर तक चलता रहा।

    सड़क सुविधा से बढ़ी यात्रियों की संख्या

    यह पहली बार है जब बैसाखी के दिन इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मचैल पहुंचे हैं। पहले यह संख्या केवल 1,500 से 2,000 के आसपास रहती थी। भीड़ बढ़ने का मुख्य कारण सड़क मार्ग का विस्तार है; अब गाड़ियां मंदिर से महज एक किलोमीटर दूर 'दर्शन गेट' तक पहुंच रही हैं।

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    यातायात और आगामी यात्रा का शेड्यूल प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए निजी वाहनों को गुलाबगढ़ से आगे जाने की अनुमति नहीं दी है। श्रद्धालु गुलाबगढ़ से आगे स्थानीय सवारी वाहनों के जरिए मंदिर तक पहुंच रहे हैं।

    • 15 जुलाई तक: मंदिर के कपाट दर्शन के लिए खुले रहेंगे।

    • 16 से 25 जुलाई: 10 दिनों के लिए कपाट बंद किए जाएंगे।

    • 25 जुलाई के बाद: वार्षिक मचैल यात्रा का औपचारिक शुभारंभ होगा।

    श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर के बाहर स्थानीय लोगों द्वारा लंगरों की व्यवस्था की गई थी, जहां सभी भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।