बोकारो की इस बरात ने बटोरी सुर्खियां, पुराने जमाने की परंपरा देख भावुक हुए लोग
Bullock Cart Wedding: बोकारो के कसमार में जनार्दन कुमार महतो ने बिना दहेज शादी कर और बैलगाड़ी से दुल्हन लाकर समाज को सादगी का संदेश दिया। ...और पढ़ें

बैलगाड़ी पर सवार दुल्हन श्वेता कुमारी और दूल्हे जनार्दन महतो। (फोटो जागरण)
HighLights
जनार्दन ने बिना दहेज बैलगाड़ी से दुल्हन लाकर समाज को संदेश दिया।
यह विवाह पारंपरिक कुड़माली रीति-रिवाजों और सादगी से संपन्न हुआ।
बराती 5 किमी पैदल चलकर लोकधुनों पर थिरकते हुए पहुंचे।
संवाद सहयोगी, कसमार (बोकारो)। Eco-friendly Wedding Transport:आज के दौर में जब शादियां भव्य आयोजन का रूप ले चुकी हैं और दूल्हे की बरात महंगी व लग्जरी गाड़ियों के लंबे काफिले के साथ निकलना आम बात हो गई है, ऐसे समय में झारखंड के बोकारो जिले के कसमार प्रखंड के तेलियाडीह टांगटोना निवासी जर्नादन महतो ने अपनी सादगी और परंपरा से अलग पहचान बनाई है। उनकी बरात ने लोगों को पुराने दौर की याद दिला दी।
बरात का अनोखा अंदाज देखने के लिए रास्ते भर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और हर कोई इस पहल की सराहना करता नजर आया। उनकी बरात और शादी चर्चा का विषय बन गया है। इस शादी को आदर्श विवाह के रूप में देखा जा रहा है।
कसमार के तेलियाडीह टांगटोना निवासी शिव महतो के पुत्र जनार्दन कुमार महतो ने बिना दहेज शादी रचाकर और बैलगाड़ी पर दुल्हन लाकर अपने पुरखों की सदियों पुरानी परंपरा को जीवंत कर दिया। वर पक्ष जनार्दन कुमार महतो, मुंगो बगदा निवासी नागेश्वर महतो की पुत्री श्वेता कुमारी से विवाह के लिए लगभग पांच किलोमीटर की दूरी तय कर बैलगाड़ी से बरात लेकर पहुंचे।
इस बारात की सबसे खास बात यह रही कि इसमें कोई महंगी गाड़ियां शामिल नहीं थीं। बराती पूरी तरह से कुड़माली लोकधुनों पर थिरकते नजर आए। रास्ते भर पारंपरिक घोड़ा नाच आकर्षण का केंद्र बना रहा। साथ ही आधुनिक गाड़ियों की जगह सभी बराती नाचते-गाते पैदल ही बगदा गांव पहुंचे।
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यह विवाह न केवल सादगी बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी समृद्ध रहा। शादी की सभी रस्में पूरी तरह से पारंपरिक कुड़माली नेगाचारी (रीति-रिवाज) के अनुसार संपन्न की गईं। विवाह संपन्न होने के बाद, दूल्हा जनार्दन अपनी दुल्हन श्वेता को विदा कर बैलगाड़ी से ही वापस अपने घर लेकर आए। इस अनोखी विदाई को देखने के लिए ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।