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    CM हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा तक पहुंच होगी आसान, नई सड़क से 30 किमी घटेगी दूरी

    Updated: Sat, 25 Jul 2026 04:19 PM (IST)

    Jharkhand News: कसमार-नेमरा पथ के निर्माण कार्य ने गति पकड़ ली है, जिससे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा तक सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। ...और पढ़ें

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गांव जाने वाली बरलंगा-कसमार-नेमरा सड़क। (प्रतीकात्मक फोटो)

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गांव जाने वाली बरलंगा-कसमार-नेमरा सड़क। (प्रतीकात्मक फोटो)

    HighLights

    1. कसमार-नेमरा पथ निर्माण कार्य ने पकड़ी गति, क्षेत्र को मिलेगा लाभ।

    2. मुख्यमंत्री के पैतृक गांव नेमरा से सीधी सड़क कनेक्टिविटी मिलेगी।

    3. कसमार से नेमरा की दूरी लगभग 30 किलोमीटर कम होगी।

    विकास गोस्वामी, कसमार (बोकारो)। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा तक पहुंचना जल्द ही आसान होगा। बोकारो से नेमरा को जोड़ने वाले बरलंगा-कसमार-नेमरा सड़क मार्ग के निर्माण कार्य में तेजी लाई गई है। सड़क बनने के बाद न सिर्फ आवागमन सुगम होगा, बल्कि बोकारो और नेमरा के बीच की दूरी भी कम हो जाएगी।

    स्टेट हाईवे अथॉरिटी ऑफ झारखंड (SHAJ) के तहत बरलंगा–कसमार–नेमरा पथ के निर्माण कार्य ने एक बार फिर गति पकड़ ली है। कसमार प्रखंड के चौड़ा गांव से गोला प्रखंड के सुथरपुर जंगल तक अधूरी पड़ी इस सड़क के निर्माण के लिए पहाड़ी क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के बाद अब पहाड़ को समतल कर सड़क तैयार करने का काम तेजी से किया जा रहा है।

    इस मार्ग के पूरी तरह बनने से बोकारो जिले के कसमार प्रखंड और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा के बीच सीधा सड़क संपर्क स्थापित हो जाएगी।

    30 किलोमीटर तक कम होगी दूरी

    वर्तमान समय में कसमार से गोला होते हुए नेमरा की दूरी लगभग 53 किलोमीटर है, जबकि नई सड़क के बन जाने के बाद पिरगुल के रास्ते यह दूरी घटकर मात्र 20 से 22 किलोमीटर रह जाएगी। यानी आवागमन में करीब 30 किलोमीटर की भारी कमी आएगी।

    इसके साथ ही, बोकारो से नेमरा की दूरी भी लगभग 100 किलोमीटर से घटकर करीब 60 किलोमीटर रह जाने का अनुमान है।

    कई जिलों के यात्रियों को मिलेगी सहूलियत

    इस मार्ग के शुरू होने से केवल कसमार और गोला प्रखंड के लोगों को ही नहीं, बल्कि बोकारो, धनबाद, गिरिडीह, हजारीबाग, कोडरमा और दुमका की ओर से आने-जाने वाले लोगों के लिए भी नेमरा तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा।

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    इसके अलावा, टाटा, जमशेदपुर और चाईबासा की दिशा में आवागमन करने वालों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग साबित होगा।

    झारखंड आंदोलन के इतिहास से जुड़ा है गहरा नाता

    इस सड़क का निर्माण केवल एक बुनियादी ढांचागत परियोजना नहीं है, बल्कि इसका ऐतिहासिक महत्व भी है। स्थानीय लोगों के संस्मरणों के अनुसार, महाजनी प्रथा के खिलाफ संघर्ष और धानकटनी आंदोलन के दौर में जब दिशोम गुरु शिबू सोरेन प्रशासन की निगरानी से बचते हुए आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे, तब वे नेमरा से बरगा, सुथरपुर, चौड़ा, भस्की, बेलडीह और वनचास के घने जंगलों से होकर पैदल जैनामोड़ (बोकारो) तक आवाजाही किया करते थे।

    उस दौरान यह पूरा क्षेत्र दुर्गम वन क्षेत्र हुआ करता था और यही रास्ता आंदोलन की गतिविधियों का मुख्य संपर्क मार्ग था। झारखंड आंदोलनकारी और झारखंड के पुरोधा शिबू सोरेन के साथ चल रहे हैं 85 वर्षीय केदला निवासी देवशरण हेंब्रम के अनुसार जब महाजनों द्वारा शिबू सोरेन के पिता सोबरन सोरेन की हत्या के बाद महाजनी प्रथा के विरुद्ध छिड़े संघर्ष ने झारखंड आंदोलन को एक नई दिशा दी थी।

    उस कठिन दौर में शिबू सोरेन और उनके परिवार ने जैनामोड़ क्षेत्र में लंबे समय तक निवास भी किया था। उस समय बोकारो से नेमरा जाने के लिए गोला या पश्चिम बंगाल के जयपुर–झालदा मार्ग का लंबा चक्कर लगाना पड़ता था।

    विकास के नए द्वार खुलने की उम्मीद यदि निर्माण कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरा होता है, तो यह सड़क क्षेत्रीय संपर्क, पर्यटन, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास को गति देने के साथ-साथ झारखंड आंदोलन की ऐतिहासिक विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भी एक नई पहचान दिलाएगी।