फौजी कट बाल रख पुलिस जैसा दिखने की करते कोशिश, टीटीई और कोच अटेंडेंट की मिलीभगत से एसी कोच में चोरी
सांसी गिरोह का खुलासा: बिहार के बरौनी में सांसी गिरोह के तीन सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद रेलवे सुरक्षा बल सतर्क हो गया है। यह गिरोह एसी कोच अटेंडेंट क ...और पढ़ें

बिहार के बरौनी में बीते माह तीन की गिरफ्तारी के बाद रेलवे अलर्ट।
HighLights
बरौनी में सांसी गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार हुए।
गिरोह 700-1000 रुपये देकर एसी कोच में घुसता था।
आरपीएफ ने कोच अटेंडेंट की भूमिका पर चिंता जताई।
अरविंद, बोकारो। बिहार के बरौनी जंक्शन पर बीते माह हरियाणा के कुख्यात सांसी गिरोह के तीन सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद रेलवे सुरक्षा बल सतर्क हो गया है। ईस्ट सेंट्रल रेलवे, हाजीपुर मुख्यालय से सभी रेल सुरक्षा अधिकारियों और जवानों को विशेष निगरानी बरतने का निर्देश जारी किया गया है।
रिपोर्ट में गिरोह की कार्यप्रणाली का खुलासा करते हुए आरक्षित कोचों में बिना अनुमति प्रवेश रोकने और संदिग्ध यात्रियों पर कड़ी नजर रखने को कहा गया है। आरपीएफ के मुख्य सुरक्षा आयुक्त, ईस्ट सेंट्रल रेलवे, हाजीपुर अमरेश कुमार ने सभी को पत्र भेजकर सतर्क किया है।
700 से 1000 रुपये लेकर एसी कोच में प्रवेश
आरपीएफ की रिपोर्ट के अनुसार गिरोह के सदस्य सामान्य या कम दूरी का टिकट लेकर ट्रेन में सवार होते हैं। इसके बाद एसी कोच अटेंडेंट अथवा संविदाकर्मियों को 700 से 1000 रुपये प्रति व्यक्ति देकर आरक्षित एसी या स्लीपर कोच में पहुंच जाते हैं।
यात्रियों के चढ़ने-उतरने की भीड़ और अफरातफरी का फायदा उठाकर जेब काटना, पर्स और कीमती सामान चोरी करना इनका मुख्य काम है। नकदी निकालने के बाद पर्स चलती ट्रेन से यह लोग बाहर फेंक देते हैं, ताकि पहचान का कोई साक्ष्य न बचे।
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तीन आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद खुला राज
पूर्व मध्य रेलवे के बरौनी आरपीएफ इंस्पेक्टर की रिपोर्ट के अनुसार 25 जून को बरौनी स्टेशन पर हिसार निवासी रामदिया, अशोक कुमार तथा भिवानी निवासी राजेश को गिरफ्तार किया गया था। तीनों हरियाणा के कुख्यात सांसी गिरोह के सक्रिय सदस्य हैं।
पूछताछ में पता चला कि गिरोह लंबी दूरी की ट्रेनों को निशाना बनाता है। स्टेशन में प्रवेश के लिए ये लोग टूटी चारदीवारी, खाली प्लॉट और पीछे के रास्तों का इस्तेमाल करते हैं। यदि ऐसा संभव नहीं होता तो सामान्य टिकट लेकर स्टेशन में प्रवेश कर जाते हैं।
संविदाकर्मियों की जवाबदेही तय करने की जरूरत
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मामलों में कोच अटेंडेंट मामूली आर्थिक लाभ लेकर आरोपितों को आरक्षित कोच में यात्रा की अनुमति दे देते हैं। वहीं कुछ टीटीई बिना समुचित पहचान पत्र की जांच किए ईएफटी (एक्सेस फेयर टिकट) जारी कर यात्रा की अनुमति दे देते हैं।
आरपीएफ ने इसे गंभीर सुरक्षा चूक मानते हुए कहा है कि कोच अटेंडेंट और संविदाकर्मियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। छोटी रकम के लालच में ऐसे कर्मचारी न केवल नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और संपत्तिको भी खतरे में डाल रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि सांसी गिरोह के सदस्य अक्सर पुलिस जवानों जैसी लंबी कद-काठी रखते हैं और फौजी कट बाल रखकर संदेह से बचने का प्रयास करते हैं। आरपीएफ ने सभी अधिकारियों को ऐसे संदिग्ध लोगों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि इस तरह की लापरवाही पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया तो यह यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।