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    16 साल पुराने केस में चतरा के पूर्व BDO कुंदन कुमार को बड़ी राहत, हेमंत सरकार ने अभियोजन कार्रवाई की समाप्त

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 08:26 AM (IST)

    चतरा के पूर्व बीडीओ कुंदन कुमार को 16 साल पुराने अनियमितता मामले में झारखंड सरकार से बड़ी राहत मिली है। न्यायालय के दोषमुक्ति फैसले और जिला प्रशासन की ...और पढ़ें

    हेमंत सरकार ( फाइल फोटो )

    हेमंत सरकार ( फाइल फोटो )

    HighLights

    1. पूर्व बीडीओ कुंदन कुमार को 16 साल पुराने केस में राहत।

    2. झारखंड सरकार ने अभियोजन स्वीकृति संबंधी कार्रवाई समाप्त की।

    3. न्यायालय ने सातों आरोपितों को सभी आरोपों से दोषमुक्त किया।

    जागरण संवाददाता, चतरा। लगभग 16 वर्ष पुरानी विकास योजनाओं में कथित अनियमितता के मामले में सदर प्रखंड के तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी कुंदन कुमार को बड़ी राहत मिली है। झारखंड सरकार ने न्यायालय के फैसले और जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर उनके विरुद्ध चल रही अभियोजन स्वीकृति संबंधी कार्रवाई को समाप्त कर दिया है। 

    इस संबंध में कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने संकल्प जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद आदेश के राजपत्र में प्रकाशन का भी निर्देश दिया गया है।मामला राजपुर थाना कांड संख्या 09/2010 से जुड़ा है। 20 फरवरी 2010 को मामला दर्ज किया गया था। 

    2023 में प्रस्ताव सरकार के पास भेजा

    आरोप था कि तत्कालीन बीडीओ कुंदन कुमार समेत अन्य लोगों ने विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितता बरती थी। बाद में ग्रामीण विकास विभाग ने वर्ष 2023 में अभियोजन स्वीकृति का प्रस्ताव सरकार को भेजा था, जिसे विधि विभाग की सहमति के बाद स्वीकृत भी कर लिया गया था।

    मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित नहीं कर सका। न्यायालय ने पाया कि 21 गवाहों में केवल पांच की गवाही हुई, जिनमें दो गवाह पक्षद्रोही हो गए। अन्य गवाह भी आरोपों की पुष्टि नहीं कर सके। जांच अधिकारियों ने भी जांच प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण औपचारिकताएं पूरी नहीं की थीं। 

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    अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों से आरोप सिद्ध करने में पूरी तरह विफल रहा। इसके आधार पर 22 मई 2026 को पारित निर्णय में कुंदन कुमार सहित सातों आरोपितों को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया।

    अपील नहीं होने पर सरकार ने बंद की कार्रवाई

    न्यायालय के फैसले के बाद सरकार ने स्थानीय उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक से यह जानकारी मांगी थी कि फैसले के विरुद्ध अपील दायर की गई है या नहीं। उपायुक्त द्वारा उपलब्ध कराई गई सहायक लोक अभियोजक की रिपोर्ट में बताया गया कि निर्धारित अवधि तक न्यायालय के आदेश के खिलाफ कोई अपील दाखिल नहीं की गई। 

    इसके बाद सरकार ने पूरे मामले की समीक्षा कर कुंदन कुमार के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति संबंधी कार्रवाई समाप्त करने का निर्णय लिया।

    मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद जारी हुआ संकल्प

    कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से जारी संकल्प में स्पष्ट किया गया है कि न्यायालय के निर्णय और जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आलोक में तत्कालीन चतरा बीडीओ कुंदन कुमार के खिलाफ लंबित अभियोजन की कार्रवाई समाप्त की जाती है। 

    आदेश को झारखंड राजपत्र के असाधारण अंक में प्रकाशित करने तथा इसकी प्रति संबंधित अधिकारियों और कुंदन कुमार को उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया है।