मजहब की दीवार लांघकर 30 वर्षों से कायम भाई-बहन का रिश्ता, बीमारी में भी हिंदू भाई को राखी बांधने पहुंची शबरी खातून
70 वर्षीय शबरी खातून ने 30 साल से चली आ रही परंपरा निभाते हुए अपने मुंहबोले हिंदू भाई सुरेंद्र शर्मा ...और पढ़ें

भाई की कलाई पर राखी बांधने पहुंचीं 70 वर्षीय शबरी खातून। जागरण
अजीत पांडेय, प्रतापपुर (चतरा)। रिश्ते खून से नहीं, बल्कि भावना, विश्वास और आत्मीयता से बनते हैं। प्रतापपुर में रक्षाबंधन के अवसर पर भाई-बहन के ऐसे ही पवित्र रिश्ते की भावुक तस्वीर सामने आई, जिसने मजहब की तमाम सीमाओं को पीछे छोड़ दिया।
70 वर्षीय मुस्लिम महिला शबरी खातून पिछले 30 वर्षों से अपने मुंहबोले हिंदू भाई प्रतापपुर निवासी सुरेंद्र शर्मा उर्फ जीतू बाबा की कलाई पर रक्षाबंधन के दिन राखी बांधती आ रही हैं। इस वर्ष भी तबीयत खराब रहने के बावजूद वह अपने पुत्र के साथ भाई के घर पहुंचीं और राखी बांधकर तीन दशक पुरानी परंपरा को कायम रखा। शबरी खातून के भाई के घर पहुंचते ही माहौल भावुक हो गया।
उन्होंने स्नेहपूर्वक भाई की कलाई पर राखी बांधी और उनके सुख, समृद्धि, स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। राखी बंधवाने के बाद सुरेंद्र शर्मा ने जिस भाव से अपनी बहन शबरी खातून के पैर छूकर आशीर्वाद लिया, वह दृश्य वहां मौजूद लोगों को भावुक कर गया। बहन ने भी भाई को स्नेहपूर्वक आशीर्वाद दिया। इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर रक्षाबंधन की खुशियां साझा कीं।
इस दौरान भाई-बहन के चेहरे पर वर्षों पुराने रिश्ते की आत्मीयता साफ झलक रही थी। एक तरफ राखी की डोर भाई की कलाई पर बंधी थी, तो दूसरी तरफ भावनाओं की वह डोर थी, जो तीन दशकों से दोनों को एक-दूसरे से बांधे हुए है। खास बात यह रही कि इस बार शबरी खातून की तबीयत ठीक नहीं थी।
बावजूद इसके रक्षाबंधन के दिन भाई की कलाई सुनी न रहे, इसी भाव ने उन्हें भाई के घर तक पहुंचा दिया। अपने व्यवहार और भावनाओं से इस रिश्ते को इतना मजबूत बना दिया है कि अब यह प्रतापपुर में सामाजिक सौहार्द की मिसाल बन चुका है।
जहां कभी-कभी छोटी-छोटी बातों पर रिश्तों में दरार आ जाती है, वहीं शबरी खातून और सुरेंद्र शर्मा का रिश्ता समाज को यह संदेश देता है कि सच्चे रिश्तों की पहचान धर्म से नहीं, दिल से होती है।
रक्षाबंधन के इस भावुक दृश्य ने एक बार फिर साबित किया कि प्यार और भाईचारे की भाषा किसी मजहब की मोहताज नहीं होती। शबरी खातून द्वारा तीन दशक से निभाई जा रही राखी की यह परंपरा और भाई सुरेंद्र शर्मा का बहन के पैर छूकर आशीर्वाद लेना सामाजिक एकता, आपसी सम्मान और सांप्रदायिक सौहार्द की ऐसी मिसाल है, जिसकी खुशबू लंबे समय तक बनी रहेगी।
