यहां एक साथ कीजिए 1008 शिवलिंगों का अभिषेक, देश में दुर्लभ है इटखोरी का सहस्त्रलिंगम शिवलिंग
चतरा के इटखोरी स्थित भद्रकाली मंदिर परिसर में एक दुर्लभ सहस्त्रलिंगम शिवलिंग है। यह साढ़े चार फीट ऊंचा शिवलिंग एक ही काले पत्थर से बना है, जिसमें 1008 ...और पढ़ें

भद्रकाली मंदिर परिसर स्थित सहस्त्रलिंगम शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
HighLights
इटखोरी का सहस्त्रलिंगम शिवलिंग साढ़े चार फीट ऊंचा है।
एक ही काले पत्थर से तराशे गए हैं 1008 छोटे शिवलिंग।
शीर्ष पर जल से सभी 1008 शिवलिंगों का एक साथ अभिषेक।
पंकज सिंह, इटखोरी (चतरा)। चतरा जिले के इटखोरी स्थित भद्रकाली मंदिर परिसर में आस्था और चमत्कार का अनूठा संगम देखने को मिलता है। भद्रकाली मंदिर परिसर स्थित सहस्त्रलिंगम शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
यह शिवलिंग लगभग साढ़े चार फीट ऊंचा है और अपनी दुर्लभ बनावट के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। सहस्त्र शिवलिंग एक ही काले पत्थर को तराश कर बनाया गया है, जिसमें 1008 छोटे शिवलिंग बने हुए हैं।
नौवीं शताब्दी काल में स्थापित किया गया था सहस्त्रलिंगम शिवलिंग
पुरातत्विदों के अनुसार यह सहस्त्रलिंगम शिवलिंग नौवीं शताब्दी काल में स्थापित किया गया था। इसकी संरचना ऐसी है कि जब सहस्त्रलिंगम शिवलिंग के शीर्ष पर जल अर्पित किया जाता है, तो जल स्वतः प्रवाहित होकर एक साथ 1008 शिवलिंगों का जलाभिषेक कर देता है। यही विशेषता इसे अलौकिक और चमत्कारी बनाती है।
कहा जाता है कि यह शिवलिंग यहां खुदाई के दौरान प्राप्त हुआ था। इसके बाद इसे भद्रकाली मंदिर परिसर में विधिवत स्थापित किया गया। जानकारी के अनुसार इस प्रकार का सहस्त्रलिंगम शिवलिंग मध्यप्रदेश के बाद देश में केवल झारखंड के इटखोरी में ही मौजूद है।
सहस्त्र शिवलिंग मंदिर के ठीक सामने नंदी की विशालकाय मूर्ति भी स्थापित है, जो इस स्थल की भव्यता और धार्मिक महत्व को और बढ़ा देती है। शिवलिंग और नंदी की यह संगति श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
महामृत्युंजय मंत्र जाप का विशेष महत्व
श्रद्धालुओं के मुताबिक यहां महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है। इस पवित्र स्थल पर नियमित रूप से महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से भय, रोग और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं।
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स्थानीय पुजारियों और श्रद्धालुओं का मानना है कि सच्चे मन से यहां दर्शन, जलाभिषेक और मंत्र जाप करने से रोग, शोक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। सावन माह, महाशिवरात्रि और श्रावणी मेले के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।