झारखंड में रेलवे निर्माण के नाम पर ‘धांधली’, 11 एकड़ जमीन से अवैध खनन; कंपनियों पर FIR के बाद हड़कंप
चतरा के टंडवा में रेलवे लाइन और फुलवारिया स्टेशन निर्माण के नाम पर 11 एकड़ गैरमजरूआ और रैयती जमीन से अवैध मिट्टी-पत्थर खनन का बड़ा मामला सामने आया है। ...और पढ़ें

रेलवे निर्माण के नाम पर महाघोटाला

समय कम है?
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राजेश ठाकुर, टंडवा (चतरा)। रेलवे लाइन बेड एवं फुलवारिया स्टेशन निर्माण कार्य के नाम पर अवैध मिट्टी और पत्थर खनन का बड़ा मामला सामने आया है। ग्रामीणों की शिकायत पर हुई जांच में 11 एकड़ गैरमजरूआ खास भूमि के साथ-साथ रैयती जमीन से भी बड़े पैमाने पर मिट्टी निकासी की पुष्टि हुई है। इस अवैध खनन ने इलाके का भौगोलिक स्वरूप ही बदल दिया है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
उपायुक्त रवि आनंद के निर्देश पर टंडवा थाना में प्राथमिकी दर्ज कर कराई गई है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद निर्माता कंपनियों और बिचौलियों में हड़कंप मचा हुआ है।
गैरमजरूआ भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध खनन
दैनिक जागरण में खबर प्रकाशित होने के बाद उपायुक्त ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच का निर्देश दिया। 30 अप्रैल को राजस्व टीम ने फुलवारिया और गोविंदपुर गांव में जांच की। जांच में पाया गया कि फुलवारिया के खाता संख्या 142, प्लॉट 349 की 7.98 एकड़ गैरमजरूआ भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध खनन हुआ है।
वहीं गोविंदपुर के खाता संख्या 13, प्लाट 85 की लगभग तीन एकड़ भूमि से करीब 14 फीट तक मिट्टी काटी गई है। स्थिति और भी गंभीर तब सामने आई जब कुछ स्थानों पर 32 फीट तक गहराई में खनन के प्रमाण मिले। गोविंदपुर में नदी किनारे भी अवैध रूप से पत्थरों की निकासी की गई है।
अवैध खनन तत्काल रोकने का निर्देश
प्रशासन ने इस मामले में संबंधित रेलवे संवेदक कंपनियों—एरोकॉन, मिलिनियम, झांझरिया और रायल को अवैध खनन तत्काल रोकने का निर्देश दिया है।
गौरतलब है कि वर्ष 2024-25 में भी राजा कंस्ट्रक्शन कंपनी पर अवैध मिट्टी निकासी के मामले में करोड़ों रुपये का जुर्माना लगाते हुए उसे ब्लैकलिस्ट किया गया था। बावजूद इसके ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति प्रशासनिक सख्ती पर सवाल खड़े करती है।
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किसानों की जमीन हुई बर्बाद, नदी का अस्तित्व खतरे में
मिश्रोल पंचायत के मुखिया सुवेश राम ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केढ़नी नदी का अस्तित्व लगभग मिटा दिया गया है। उन्होंने बताया कि जहां रैयती जमीन से 2.5 से 3 फीट तक मिट्टी काटने की अनुमति होती है, वहां 10 फीट तक अवैध खनन किया गया है।
उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने अपनी जमीन से मिट्टी देने की अनुमति दी थी, आज उनकी जमीन पूरी तरह अनुपयोगी हो चुकी है। न तो वहां खेती संभव है और न ही मकान निर्माण। किसान अब अपने फैसले पर पछता रहे हैं।
मुखिया ने यह भी आरोप लगाया कि भूदान में मिली भुइया जाति की जमीन को भी कंपनियों ने बर्बाद कर दिया है। जमीन पर बड़े-बड़े पत्थर छोड़ दिए गए हैं, जिससे वह पूरी तरह बेकार हो चुकी है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।