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    देवघर की अनोखी परंपरा: बाबा बैद्यनाथ से पहले होता है मां काली का श्रृंगार, क्या है धार्मिक महत्व

    Updated: Sat, 01 Aug 2026 07:00 AM (IST)

    देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर में एक अनूठी परंपरा है, जहाँ बाबा का श्रृंगार करने से पहले माँ काली का श्रृंगार किया जाता है। यह स्थल हृदयपीठ कहलाता है। ...और पढ़ें

    देवघर की अनोखी परंपरा

    देवघर की अनोखी परंपरा

    HighLights

    1. बाबा बैद्यनाथ से पहले माँ काली का श्रृंगार होता है।

    2. देवघर हृदयपीठ है, जहाँ शिव-शक्ति एक साथ विराजमान।

    3. शिव पुराण में बैद्यनाथ को सर्वश्रेष्ठ ज्योतिर्लिंग कहा गया।

    आरसी सिन्हा, देवघर। शिव पुराण के अध्याय 38 में वैद्यनाथं चिताभूमौ का उल्लेख किया गया है। बृहत्स्तोत्ररत्नाकार में श्लोक है- पूर्वाेत्तर प्रज्वलिकानिधाने, सदा वसंत गिरजासमेतम्। सुरासुराराधितपादपद्यं श्रीवैद्यनाथं तमहं नमामि।। प्रज्वलिका निधान का आशय है चिताभूमि में वैद्यनाथ स्थापित हैं।

    आप नहीं जानते, तो जानिए । बाबा बैद्यनाथ से पहले मां काली का श्रृंगार होता है। देवघर सती का स्थल है। यह हृदयपीठ है। यहां शक्ति के साथ शिव हैं। इसलिए शाम में पुजारी पहले मां काली का श्रृंगार करते हैं। उसके बाद बाबा बैद्यनाथ का श्रृंगार करते हैं। चिताभूमि के बैद्यनाथ की कथा निराली है। महिमा विराट है।

    आदि शंकराचार्य ने लिखा है कि जो पूर्वाेत्तर दिशा में चिताभूमि के भीतर सदा ही गिरिजा के साथ वास करते हैं, देवता और असुर जिनके चरण कमलों की आराधना करते हैं उन श्री बैद्यनाथ को प्रणाम करता हूं। 

    चंद्रचूड़ामणि पीठ में लिखा है कि बैद्यनाथधाम में शिव-शक्ति का आलय और देवालय है। इसलिए कहा जाता है कि यहां शिव-शक्ति एक साथ विराजमान हैं।

    शिव पुराण में बैद्यनाथ के विषय में चर्चा 

    बैद्यनाथधाम भारत वर्ष का आध्यात्मिक और धार्मिक केंद्र रहा है। शिव महापुराण में बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग को सर्वश्रेष्ठ ज्योतिर्लिंग कहा गया है। शिव पुराण में बैद्यनाथ के विषय में चर्चा की गयी है।

    त्रेता युग से शुरू हुई बाबा बैद्यनाथ मंदिर की परंपरा का निर्वहन हर युग में उसी अनुरूप की जाती है। द्वादश ज्योतिर्लिंग में एक देवघर ही एकमात्र तीर्थस्थल है जहां शिव और शक्ति एक साथ विराजमान हैं। यहां सती के हृदय पर बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग स्थापित है। यह हृदय स्थल कहा जाता है। शिव-शक्ति स्थल होने के कारण महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां चार प्रहर की पूजा में चार बार जावा फूल से ज्योतिर्लिंग पर सिंदूर अर्पित होता है।

    देश के द्वादश ज्योतिर्लिंग में एकमात्र झारखंड के देवघर में स्थापित बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग है जहां शिव और शक्ति एक साथ विराजमान हैं। यहां माता का हृदय गिरा है, इसलिए यह हृदयपीठ है। यह शक्तिपीठ है। इसलिए यहां की प्राचीन परंपरा है कि जलार्पण के बाद शाम में बाबा बैद्यनाथ का श्रृंगार करने से पहले पुजारी पहले मां काली का श्रृंगार करते हैं।  बाबा भोलेनाथ का श्रृंगार करने के बाद पुजारी मंदिर प्रांगण के सभी 22 मंदिर में धूप-दीप दिखाते हैं। - श्रीनाथ पंडित, बाबा मंदिर इस्टेट पुरोहित।



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