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देवघर में बाइक-साइकिल का भी भार नहीं झेल सका पुल, चंद सालों में पड़ गई दरारें; करोड़ों रुपये बर्बाद

Published: Thu, 14 May 2026 02:43 AM (IST)

देवघर के सारठ प्रखंड में 1.55 करोड़ की लागत से बना पुल आठ साल बाद भी एप्रोच पथ न होने ...और पढ़ें

दरार वाला पुल। फोटो जागरण

दरार वाला पुल। फोटो जागरण

HighLights

  1. 1.55 करोड़ का पुल आठ साल से अनुपयोगी।

  2. एप्रोच पथ न होने से वाहनों का आवागमन नहीं।

  3. बिना उपयोग के ही पुल में दरारें आईं।

अनुज भोक्ता, सारठ, (देवघर)। ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च स्तरीय पुल का निर्माण विकास की अहम कड़ी है तथा जीवन स्तर में सुधार का एक प्रमुख कारण है। यह भौतिक, तकनीकी और सामाजिक बाधाओं को दूर कर विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।

पुल निर्माण से विशेषकर जोरिया, नदी नाला में बाढ़ एवं बारिश के दौरान गांवों को मुख्य सड़कों तक जोड़ता है। करोड़ों रुपए की लागत से निर्मित पुल की सुरक्षा और उपयोगिता की जिम्मेवारी संबंधित अधिकारी की होती है।

सारठ प्रखंड अंतर्गत फुलचुवां गांव से करमा के बीच जोरिया पर ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल देवघर द्वारा करीब 1.55 करोड़ की लागत से बनी पुल लूट की कहानी बयां कर रही है।

आश्चर्य की बात यह है कि पुल बनने के आठ साल बाद भी इसकी उपयोगिता शून्य है। उक्त पुल भारी भरकम वाहन की कौन पूछे, बाइक का भी भार सहन नहीं कर पाया है।

यह पुल किसी तरह से साइकिल व बाइक वालों के पार करने का जरिया बनकर रह गया है। ऐसे भारी वाहनों के आवाजाही के बगैर ही पुल में कई जगह दरार आ गई है।

एप्रोच पथ की वजह से आवागमन बाधित

68.44 मीटर लंबी उच्च स्तरीय पुल बनाने का उद्देश्य ग्रामीण समुदायों को मुख्य सड़क तक जोड़ना था, लेकिन एप्रोच पथ नहीं बनने के कारण आज तक उक्त पुल पर चार पहिया वाहन का आवागमन नहीं हुआ।

मिली जानकारी के अनुसार मई 2018 में उक्त पुल के निर्माण का कार्य पूर्ण किया गया है। पुल के एक और जमाबंदी जमीन पर एप्रोच पथ बनाने का रैयतों ने विरोध किया।

रैयतों का कहना था कि विकास कार्यों को बाधा पहुंचाना उनका मकसद नहीं है, बल्कि एप्रोच पथ बनाने में उनकी जितनी जमीन ली जाएगी उसका समुचित मुआवजा चाहिए। लेकिन अधिकारी एवं संवेदक ने इस पर कोई पहल नहीं की।

सरकार की इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी पुल की कोई उपयोगिता साबित नहीं हुई। वहीं वाहनों के आवागमन के बिना ही पुल में कई जगह दरार आ गई है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित अधिकारी एवं संवेदक के मिलीभगत से पुल निर्माण में जमकर लूट मचाई गई है। लगातार शिकायत करने के बाद भी किसी ने संज्ञान नहीं लिया, जिसका खामियाजा आमजनों को उठाना पड़ रहा है।

ग्रामीणों की राय

जनता के पैसे से जोरिया में पुल का निर्माण तो हुआ, लेकिन इसका फायदा नहीं मिला। पुल शोभा की वस्तु बनकर रह गया है। पुल के ऊपर जिस तरह से दरार आई है, बाइक सवार कभी दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं। इसे देखने वाला कोई नहीं है। - प्रदीप कुमार राय

बिना एप्रोच पथ बने उच्च स्तरीय पुल का क्या महत्व है। इसे अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि को समझना चाहिए। पुल में सिर्फ बाइक चलने से ये हाल है तो भारी भरकम वाहन चलने से क्या होगा। इसकी समुचित जांच होनी चाहिए। - समीर मिश्रा

जोरिया में बड़ा पुल तो बना लेकिन इसका फायदा ग्रामीणों को नहीं मिला। बिना एप्रोच पथ बने अधिकारी ने पुल को फाइनल कैसे कर दिया। बिना वाहन चले पुल में दरार कैसे आ गई, इन सब बिंदुओं पर जांच होनी चाहिए। - परेश चंद्र राय

पुल निर्माण तो हुआ लेकिन इसकी उपयोगिता सिद्ध नहीं हुई। आज तक एप्रोच पथ नहीं बना। पुल पर वाहनों का यातायात सपना बनकर रह गया। उसके बावजूद पुल में दरार आना लूट खसोट की कहानी बयां करती है। इसकी जांच होनी चाहिए। - दशरथ महरा

स्थल पर जाकर देखने से पता चलेगा कि क्या क्षति हुई है। पुल के ज्वाइंट में मेटेरियल भरा जाता है। पुल की उपयोगिता क्यों नहीं हुई, सारे तथ्यों की जांच कराई जाएगी। - दिनेश प्रसाद, कार्यपालक अभियंता, स्पेशल डिविजन

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