देवघर में श्रावणी मेला की तैयारी तेज: कॉरिडोर-होल्डिंग प्वाइंट हो रहा निर्माण, गर्भगृह में मोबाइल के इस्तेमाल पर रोक
देवघर में श्रावणी मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं, जिसमें बीएड कॉलेज ग्राउंड में होल्डिंग प्वाइंट और मंदिर से नंदन पहाड़ तक कॉरिडोर का निर्माण शामिल ह ...और पढ़ें
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HighLights
श्रावणी मेले की तैयारियां तेज, कॉरिडोर और होल्डिंग प्वाइंट बन रहे।
बाह्य अरघा शारीरिक रूप से अक्षम भक्तों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था।
बाबा मंदिर गर्भ गृह में मोबाइल, कैमरा उपयोग पर प्रतिबंध।
संवाद सूत्र, देवघर। श्रावणी मेला की तैयारी चल रही है। बीएड कॉलेज ग्राउंड में होल्डिंग प्वाइंट बनाया जा रहा है। कांवड़ियों के क्यू के लिए मंदिर से नंदन पहाड़ तक कॉरिडोर बनाने का काम भी जगह जगह शुरू कर दिया गया है। इधर मंदिर की भी तैयारी चल रही है। जिला प्रशासन और तीर्थ पुरोहित की समन्वय बैठक में भी कई निर्णय लिए गए हैं। यह सब भक्तों की सुविधा को सुचारू बनाए रखने की दिशा में किया गया है।
पंडा धर्मरक्षिणी सभा के वरीय उपाध्यक्ष चंद्रशेखर खवाड़े ने जानकारी देते हुए बताया कि सभा के सदस्यों और जिला प्रशासन देवघर की एक बैठक हुई थी। जिसमें कई बिंदुओं पर विचार विमर्श करके कुछ बिंदुओं पर निर्णय भी लिया गया है।
इन सभी में मुख्य रूप से बाबा बैद्यनाथ मंदिर में जलार्पण के लिए बाह्य अरघा के विषय पर चर्चा है। बाबा मंदिर में पूजा अर्चना पूर्व की भांति ही आज भी स्पर्श करके हो रही है।
बाह्य अरघा लगाने की प्रक्रिया चल रही है और वह अपने ऐसे श्रद्धालुओं के लिए है जो शारीरिक रूप से सक्षम नहीं है, शीघ्र दर्शनम कूपन की राशि खर्च करने में सक्षम नहीं है अथवा ऐसे बीमार, बुजुर्ग, महिला, बच्चे जिनका एकमात्र उद्देश्य बाबा के ऊपर अपने जल को अर्पण करने मात्र से है।
उनके लिए बाह्य अरघा लगा रहेगा परंतु स्पर्श पूजा या किसी भी पौराणिक पद्धति से किसी भी प्रकार का कोई बदलाव अथवा बंद नहीं किया गया है। आगामी श्रावण मास में पूजा की व्यवस्था के लिए एक बैठक 15 जुलाई को होने वाली है फिर उसके बाद स्थिति और भी स्पष्ट हो जाएगी।
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बाबा मंदिर के गर्भ गृह में मोबाइल से अथवा कैमरा से किसी भी प्रकार का फोटो, वीडियो, रील ,सेल्फी इत्यादि लेने पर प्रतिबंध लगाया गया है। अभी स्पर्श पूजा पूर्व की भांति ही चल रही है।
आने वाले दिनों में बाह्य अरघा अपनी इच्छा से जलार्पण करने वालों के लिए एक विकल्प के रूप में मंदिर में रहेगा। इससे मंदिर की पूजा पद्धति, स्पर्श पूजा जैसे किसी भी अन्य धार्मिक कार्यों में कोई भी परिवर्तन अथवा समस्या नहीं आएगी।