बाबा बैद्यनाथ में दान की करेंसी बता रही आस्था की कहानी, भूटान-थाईलैंड और UAE से देवघर आए सनातनी
देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर में श्रावणी मेले के दौरान भक्तों की संख्या और दान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, ...और पढ़ें

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HighLights
श्रावणी मेले में 48.33 लाख भक्तों ने जलार्पण किया।
शीघ्रदर्शनम से मंदिर के कोष में 6.33 करोड़ रुपये आए।
आरसी सिन्हा, देवघर। युग-युगांतर से वैश्विक पटल पर झारखंड के देवघर में स्थापित द्वादश ज्योतिर्लिंग में एक बाबा बैद्यनाथ प्रसिद्ध है। ग्रंथों में यह प्रमाणित है शिव-शक्ति का यहां आलय और देवालय है। आदि शंकराचार्य ने भी इसका वर्णन किया है। मनोकामना लिंग के दरबार में विश्व का सर्वाधिक बड़ा धार्मिक मेला सावन में लगता है।
देश के विभिन्न प्रांतों के साथ-साथ विदेश से भी भक्त आते हैं। सावन में भी विदेशों में रह रहे सनातनियों ने बाबा भोलेनाथ को गंगाजल और बेल की पाती अर्पित किया है। मंदिर के दानपेटी में दान दिया है। मंदिर के खजाना के रिकार्ड इसके गवाह हैं।
बाबा मंदिर प्रांगण में अलग अलग स्थानों पर 18 दानपात्र हैं। अब तक मंदिर के केवल दान पात्र से 65 लाख भारतीय नोट दान स्वरूप आए हैं। समय समय पर प्रशासन की देखरेख में यह दान पात्र खोला जाता है। छह अगस्त को खुले दान पात्र से 22.88 लाख रुपया प्राप्त हुआ। जिसमें 11,610 नेपाली नोट और 66 भुटानी था।

मेला के समय दूसरी बार 13 अगस्त को जब दानपात्र खोला गया। तो भारतीय नोट 23,74,434 मिले। नेपाली 8,955, भूटानी 31, गुयाना डालर 1500, यूएई दिरहम 50 और थाईलैंड का एक सौ दान स्वरूप प्राप्त हुआ।
तीसरी बार 20 अगस्त को खुले दान पात्र की गिनती के पश्चात भारतीय नोट 17,88,138, नेपाली 6730, भूटानी 01, थाईलैंड का 20 रुपया दान स्वरूप प्राप्त हुए। मंदिर में विदेशी भक्तों के आने में कहीं ना कहीं देवघर की एयरकनेक्टिविटी भी मददगार है।
शीघ्रदर्शनम से मंदिर के खजाना में आया छह करोड़
आस्था की प्रकाष्ठा देखनी हो तो बाबा बैद्यनाथ के दरबार में आइए। भक्ति की शक्ति देखनी हो तो अजगैवीनाथ से देवघर की 105 किमी की कांवर यात्रा देखिए। अटूट आस्था का ऐसा दरबार दूजा नहीं मिलेगा।
श्रावणी मेला का अब केवल एक सोमवार शेष है और 28 अगस्त को मेला विराम लेगा। मेला शुरू होने के बाद 24 दिन बीत जाने पर अब तक 48.33 लाख भक्तों ने जलार्पण किया है।
इसमें 1,76,145 भक्तों ने शीघ्रदर्शनम का लाभ लिया है। केवल शीघ्रदर्शनम से मंदिर के कोष में 6.33 करोड़ आया है। डेडिकेटेड लाइन होने के कारण इसमें ज्यादा भक्त पूजा कर रहे हैं। इस बार रिकार्ड संख्या एक दिन में 15-16 हजार भक्तों के कूपन लेकर पूजा करने की है। जबकि 2024 में यह संख्या प्रतिदिन छह हजार से सात हजार तक ही होती थी।
पिछले साल 2025 में एक महीना में 1,68,870 श्रद्धालुओं ने शीघ्रदशर्नम का लाभ लिया था। बीते दाेनों साल की तुलना में इस साल इस सुविधा का लाभ लेने वाले भक्तों की संख्या बढ़ी है। जो यह बतला रही है कि सुविधाएं इसी तरह बढ़ती जाएगी तो भक्तों की भी संख्या बढ़ेगी।
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