देवघर के उर्दू मध्य विद्यालय में छात्राओं से पढ़वाए जा रहे बच्चे, 190 में 94 विद्यार्थी ही उपस्थित
देवघर के सारठ स्थित राजकीयकृत उर्दू मध्य विद्यालय में छात्राओं से बच्चों को पढ़वाया जा रहा है, जहाँ 190 नामांकित छात्रों में से केवल 94 ही उपस्थित मिले ...और पढ़ें

छात्राओं से पढ़वाए जा रहे बच्चे
HighLights
छात्राओं द्वारा बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।
विद्यालय में 190 में से 94 छात्र उपस्थित।
जर्जर शौचालय के कारण बच्चे खुले में शौच।
अनुज भोक्ता, सारठ (देवघर)। शिक्षा विकास का मूल आधार है। शिक्षा की बुनियाद प्राथमिक शिक्षा पर टिकी है। प्राथमिक शिक्षा ही बच्चों को उच्च शिक्षा का मार्ग प्रशस्त करती है तथा जीवन की सफलता का आधार बनती है। सरकार शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने का दावा करती है, लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है।
जागरण टीम ने शनिवार को राजकीयकृत उर्दू मध्य विद्यालय सारठ का पड़ताल किया। विद्यालय के एक कक्षा में एक से दूसरी के 24 बच्चे, दूसरे कक्षा में तृतीय और चतुर्थ के 25 बच्चे, तीसरे कक्षा में पांचवीं और छठी के 27 बच्चे तथा चौथी कक्षा में सातवीं से आठवीं के 18 बच्चे कुल 94 बच्चे पठन पाठन कर रहे थे।
अपनी पढ़ाई को छोड़कर बच्चों को पढ़ा रही छात्रा
प्रधानाध्यापक सलामत हुसैन से पूछने पर बताया कि विद्यालय में 190 बच्चे नामांकित हैं। लेकिन स्कूल में 94 बच्चे ही उपस्थित मिले। एक कक्षा में सातवीं एवं आठवीं की दो छात्रा अपनी पढ़ाई को छोड़कर बच्चों को पढ़ा रही थी।
छात्राओं से पूछने पर बतायी कि शिक्षक ने उन्हें बच्चों को पढ़ाने के लिए कहा है। विद्यालय में प्रधानाध्यापक के अलावे शिक्षक मारशैल सोरेन, टुनटुन अंसारी, जनार्दन प्रसाद यादव एवं शिक्षिका समर फातमा मौजूद थे।
बताया गया कि बच्चे स्कूल आएं इस कारण यहां एमडीएम की भी व्यवस्था है। इसके बावजूद बच्चों की उपस्थिति अपेक्षा से कम रहती है।
शौचालय जर्जर,बच्चे खुले में जाते हैं शौच
विद्यालय में बने शौचालय काफी जर्जर है। इस कारण इसका उपयोग नहीं हो पाता है। बच्चे शौच के लिए बाहर जाते हैं। बताया कि छात्राओं को काफी परेशानी होती है। शौच के लिए बाहर जाना लड़कियों के सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है। एक महिला शिक्षिका हैं उन्हें भी परेशानी होती है। बताया कि स्कूल में शौचालय होना अति आवश्यक है। वहीं बताया कि जमीन विवाद के चलते विद्यालय में एक तरफ का चाहरदीवारी भी अधूरा है।
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विद्यालय का शौचालय काफी जर्जर हो गया है। यहां शौचालय निर्माण अति आवश्यक है। शौचालय की समस्या के कारण मजबूरी में बच्चियां खुले में शौच जाती है। वहीं चाहरदीवारी भी अधूरा रहने के कारण परेशानी होती है। - सलामत हुसैन, प्रधानाध्यापक