BBMKU Dhanbad में प्रशासनिक खींचतान उजागर, प्रधान सचिव की रिपोर्ट में समन्वय की कमी और विकास कार्यों में देरी
Dhanbad News: प्रधान सचिव राहुल पुरवार की रिपोर्ट ने बीबीएमकेयू में अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी और प्रशासनिक खामियों को उजागर किया है। ...और पढ़ें

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के प्रधान सचिव राहुल पुरवार। (फाइल फोटो)
HighLights
प्रधान सचिव की रिपोर्ट में बीबीएमकेयू में समन्वय की कमी।
प्राचार्यों ने विकास योजनाओं में देरी पर उठाए सवाल।
करोड़ों का सेंट्रल एसी सिस्टम भी पड़ा है बंद।
जागरण संवाददाता, धनबाद। बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (बीबीएमकेयू) में लंबे समय से चल रही प्रशासनिक खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तथा कौशल विकास विभाग के प्रधान सचिव राहुल पुरवार ने 14 जुलाई को विश्वविद्यालय के निरीक्षण के बाद तैयार अपनी विजिट रिपोर्ट में अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी को गंभीर समस्या बताया है।
रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि प्रशासनिक तालमेल के अभाव का सीधा असर विश्वविद्यालय की विकास योजनाओं और निर्णय प्रक्रिया पर पड़ रहा है। प्रधान सचिव के दौरे के दौरान कुलपति, कुलसचिव, विश्वविद्यालय के अधिकारियों और 13 अंगीभूत कालेजों के प्राचार्यों के साथ समीक्षा बैठक हुई थी।
इसमें प्राचार्यों ने खुलकर विश्वविद्यालय प्रशासन के कामकाज पर सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि कालेजों के विकास, भवन निर्माण और अन्य जरूरी कार्यों से जुड़ी फाइलें अधिकारियों के स्तर पर अनावश्यक रूप से रोकी जाती हैं।
इससे योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं। प्रधान सचिव की विजिट रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को मिल चुकी है। विश्वविद्यालय के अधिकारी इसकी पुष्टि भी कर रहे हैं। रिपोर्ट में दर्ज टिप्पणियों पर कोई भी आधिकारिक बयान देने से बच रहा है।
रिपोर्ट में दर्ज हुई समन्वय की कमी
सूत्रों के अनुसार राहुल पुरवार ने अपनी रिपोर्ट में अधिकारियों के बीच आपसी तालमेल के अभाव को प्रमुख टिप्पणी के रूप में दर्ज किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर विश्वविद्यालय और विद्यार्थियों के हित में काम करना जरूरी है। रिपोर्ट में यह भी संकेत है कि प्रशासनिक स्तर पर बेहतर समन्वय के बिना विकास कार्यों में अपेक्षित सुधार संभव नहीं होगा।
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करोड़ों का सेंट्रल एसी बना लापरवाही की मिसाल
रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के नए परिसर में स्थापित करोड़ों रुपये की लागत वाले सेंट्रल एसी सिस्टम का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी और निर्णय लेने में देरी के कारण यह व्यवस्था लंबे समय से बंद पड़ी है। इसे सरकारी संसाधनों के समुचित उपयोग में कमी का उदाहरण माना गया है।
77 करोड़ की योजनाओं की रफ्तार पर ब्रेक
निरीक्षण के दौरान प्रधान सचिव ने विश्वविद्यालय में लगभग 77 करोड़ रुपये की लागत से चल रही विकास योजनाओं की समीक्षा की थी।
उन्होंने इन्हें चार माह के अंदर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। विजिट रिपोर्ट में यह भी दर्ज किया गया है कि कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाओं से संबंधित फाइलें अधिकारियों के स्तर पर जानबूझकर लंबित रखी गईं, जिससे कार्यों की गति प्रभावित हुई।