धनबाद BJP में गुटबाजी बेकाबू: राज - रागिनी और ढुल्लू के बाद निरसा तक पहुंची आग, केंदुआ से एयरपोर्ट तक अलग राग
धनबाद भाजपा में गुटबाजी चरम पर है, जहां राज सिन्हा और ढुल्लू महतो के खेमे अलग-अलग मुद्दों पर खुलकर सामने आ रहे हैं। यह कलह निरसा विधानसभा तक फैल गई है ...और पढ़ें
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सांसद ढुल्लू महतो और बीजेपी नेता राज सिन्हा। फाइल फोटो

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
आशीष अंबष्ठ, धनबाद। भारतीय जनता पार्टी धनबाद जिला में गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है। सिंह मेंशन-विधायक राज सिन्हा और सांसद ढुल्लू महतो के खेमे अलग-अलग हो गए हैं। दोनों गुटों के समर्थक खुलकर सामने आ रहे हैं, जिससे भाजपा की अंदरूनी कलह अब सड़क पर आ गई है।
गुटबाजी का असर सिर्फ जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं है। निरसा विधानसभा में भी संगठन अलग-थलग हो चुका है। यहां पूर्व विधायक अपर्णा सेनगुप्ता और चिरकुंडा की भाजपा राजनीति को लेकर कार्यकर्ता बंटे हुए हैं। दोनों पक्षों के समर्थक अलग-अलग मंच से अपनी ताकत दिखा रहे हैं। इससे निरसा में भी संगठन की एकजुटता टूटती दिख रही है।
इतना ही नहीं, केंदुआ का मामला हो या एयरपोर्ट का मामला, हर मुद्दे पर खेमे अलग-अलग सुर में बोलते दिखे। एक गुट केंदुआ की समस्या को लेकर अलग तरीके से आंदोलन की बात करता है तो दूसरा गुट उसी मुद्दे पर अलग रुख अपनाता है। एयरपोर्ट के मुद्दे पर भी दोनों खेमे अलग-अलग ढंग से अपनी बातों का व्याख्यान कर रहे हैं। इससे आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन रही है।
कार्यकर्ता असमंजस में, प्रदेश नेतृत्व मौन
कार्यकर्ताओं का कहना है कि बैठकों से लेकर कार्यक्रमों तक गुटबाजी साफ झलक रही है। मंच साझा होने के बाद भी नेता एक-दूसरे से दूरी बनाकर रखते हैं। समर्थक भी अब खुलकर अपने-अपने नेता के पक्ष में खड़े हो रहे हैं।
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पूरा मामला प्रदेश कमेटी के पास विचाराधीन है। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष ने अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है। कार्रवाई नहीं होने के कारण गुटबाजी का केंद्र और खेमा लगातार बढ़ता जा रहा है। जिला से लेकर मंडल स्तर तक नए-नए गुट उभर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर भी अब खुलकर बयानबाजी सामने आ रही है। राज सिन्हा समर्थक, ढुल्लू महतो समर्थक, अपर्णा सेनगुप्ता समर्थक और चिरकुंडा खेमे के लोग एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। इससे संगठन की छवि धूमिल हो रही है और आम कार्यकर्ता पशोपेश में है।
वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का मानना है कि समय रहते प्रदेश नेतृत्व ने हस्तक्षेप नहीं किया तो गुटबाजी और गहरी होगी। आगामी नगर निकाय और लोकसभा चुनाव में इसका सीधा असर पार्टी पर पड़ सकता है। फिलहाल जिला भाजपा में सबकी निगाहें प्रदेश कमेटी के फैसले पर टिकी हैं।