Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    'आने वाला समय इनोवेशन का, बदलाव का इंतजार किया तो बहुत देर हो जाएगी', IIT-ISM Dhanbad में बोले रक्षा राज्य मंत्री

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 01:38 PM (IST)

    रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने IIT (ISM) धनबाद में कहा कि इनोवेशन और स्वदेशी तकनीक भारत के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं, और बदलाव का इंतजार करने से दे ...और पढ़ें

    IIT (ISM) के शताब्दी समारोह में मंचासीन रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, सेल के चेयरमैन अशोक पांडा और अन्य। (फोटोः जागरण)

    IIT (ISM) के शताब्दी समारोह में मंचासीन रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, सेल के चेयरमैन अशोक पांडा और अन्य। (फोटोः जागरण)

    HighLights

    1. इनोवेशन और स्वदेशी तकनीक भारत के भविष्य की कुंजी।

    2. रक्षा निर्यात 646 करोड़ से बढ़कर 38,424 करोड़ हुआ।

    3. IIT ISM को माइनिंग से मैन्युफैक्चरिंग पर ध्यान देना होगा।

    जागरण संवाददाता, धनबाद। केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि आने वाला समय इनोवेशन और स्वदेशी तकनीक का है। दुनिया में तकनीक हर घंटे बदल रही है और यदि हम बदलाव का इंतजार करते रहे, तो बहुत देर हो जाएगी।

    उन्होंने कहा कि देश को अगले 100 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर आज से ही नई तकनीक और स्वदेशी समाधान विकसित करने होंगे। इसके लिए शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को प्रयोगशालाओं से निकलकर ऐसी तकनीक विकसित करनी होगी, जिसका सीधा लाभ देश और समाज को मिले।

    रक्षा राज्य मंत्री शनिवार को IIT (ISM) Dhanbad के शताब्दी समारोह और एनएसी-2026 के 20वें संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 100 वर्ष किसी संस्थान के लिए सामान्य उपलब्धि नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन है।

    कहा-अब पीछे मुड़कर यह देखने के बजाय कि पिछले 100 वर्षों में क्या किया गया, अगले 100 वर्षों में क्या करना है, इस पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 2047 में जब भारत आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब देश कैसा होगा, इसकी नींव आज के युवा तैयार करेंगे।

    उन्होंने रक्षा क्षेत्र में भारत की बदलती स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ वर्ष पहले तक भारत रक्षा उपकरणों का बड़ा आयातक था. वर्ष 2013 में देश का रक्षा निर्यात केवल 646 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये हो गया है।

    आज भारत 102 देशों को रक्षा सामग्री निर्यात कर रहा है। देश का रक्षा उत्पादन पिछले वर्ष करीब 1.78 लाख करोड़ रुपये रहा और 2029 तक इसे तीन लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

    ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाई स्वदेशी क्षमता

    संजय सेठ ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर स्वदेशी रक्षा तकनीक की ताकत का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भारत ने पहले जिन युद्धों में विदेशी हथियारों पर निर्भरता देखी, उसके विपरीत ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का प्रभावी इस्तेमाल किया गया। इससे दुनिया का ध्यान भारत की तकनीकी और रक्षा क्षमता की ओर गया। उन्होंने विद्यार्थियों से ड्रोन, एयरोस्पेस, साइबर सुरक्षा और एआई के क्षेत्र में नए प्रयोग करने का आह्वान किया।

    उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को रोजगार के लिए खतरे के रूप में देखने की जरूरत नहीं है। एआई का इस्तेमाल किसानों, स्वास्थ्य, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में नई सुविधाएं विकसित करने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के युवा और स्टार्टअप दुनिया में किसी से पीछे नहीं हैं. देश में युवाओं को प्रोटोटाइप और रक्षा तकनीक विकसित करने के लिए आइडेक्स जैसी योजनाओं के माध्यम से वित्तीय सहायता दी जा रही है।

    खबरें और भी

    माइनिंग से आगे बढ़कर मैन्युफैक्चरिंग पर जोर

    रक्षा राज्य मंत्री ने आईआईटी आईएसएम के विद्यार्थियों को माइनिंग के क्षेत्र में नया होमवर्क भी दिया. उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में माइनिंग पर काफी काम हुआ, लेकिन अब केवल खनन तक सीमित रहने के बजाय मैन्युफैक्चरिंग और बाय-प्रोडक्ट पर ध्यान देना होगा।

    उन्होंने कहा कि खदानों में लाखों क्यूबिक मीटर पानी मौजूद है। इस पानी का उपयोग सिंचाई, पेयजल और मत्स्य पालन के लिए कैसे किया जा सकता है, इस पर शोध होना चाहिए। इससे झारखंड में कृषि और मत्स्य पालन के क्षेत्र में बड़ी क्रांति आ सकती है।

    उन्होंने युवाओं से कहा कि आज का युवा केवल नौकरी और वेतन के बारे में नहीं सोचता, बल्कि यह भी देखता है कि उसने समाज और देश को क्या दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को भारत का ब्रांड एंबेसडर बताते हुए कहा कि 2047 के विकसित भारत के निर्माण में उनकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

    बदलाव के साथ चलना जरूरी : अशोक पांडा

    कार्यक्रम में सेल के चेयरमैन अशोक पांडा ने कहा कि बदलते कारोबारी माहौल के अनुरूप खुद को ढालना ही किसी संस्थान और कंपनी की सफलता की कुंजी है। कंपनियों में पुरानी और नयी पीढ़ी के विचारों का समन्वय जरूरी है। जो कंपनियां समय के साथ बदलाव को स्वीकार करती हैं, वही आगे बढ़ती हैं।

    उन्होंने कहा कि आईआईटी आईएसएम और सेल के बीच वर्षों से मजबूत संबंध रहा है। सेल में आईआईटी आईएसएम के बड़ी संख्या में पूर्व छात्र कार्यरत हैं। पहले संस्थान से मुख्य रूप से माइनिंग और उससे जुड़े क्षेत्रों के विद्यार्थियों का चयन होता था, लेकिन अब अन्य विषयों के विद्यार्थियों के लिए भी अवसर बढ़ाने की जरूरत है।

    अशोक पांडा ने कहा कि भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और तीसरे स्थान की ओर बढ़ रहा है। इसके बाद दूसरे और पहले स्थान तक पहुंचने के लिए बड़ी छलांग की जरूरत होगी। इसके लिए आत्मनिर्भर तकनीक, नवाचार और अपनी क्षमताओं का विकास करना होगा।

    उन्होंने कहा कि भारत को स्टील, महत्वपूर्ण खनिज, माइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में चीन से मौजूद अंतर को कम करना होगा. देश को विदेशी तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय अपनी तकनीक विकसित करनी होगी. उन्होंने केवल जीडीपी नहीं, बल्कि जीएनपी बढ़ाने पर भी जोर दिया।

    देश की समस्याओं पर केंद्रित हो शोध : संघमित्रा

    भारतीय राष्ट्रीय इंजीनियरिंग अकादमी की फेलो संघमित्रा बंद्योपाध्याय ने कहा कि भविष्य उन्हीं विशेषज्ञों का है, जो अपने क्षेत्र की विशेषज्ञता के साथ एआई का इस्तेमाल करना जानते हों।

    उन्होंने विद्यार्थियों से आईएनएई परिवार का हिस्सा बनने का लक्ष्य रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग और शोध का उद्देश्य केवल महत्वपूर्ण सिद्धांतों का समाधान करना नहीं, बल्कि देश की वास्तविक समस्याओं का समाधान तलाशना होना चाहिए।

    उन्होंने एआई और मशीन लर्निंग के साथ कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी जैसे बहुविषयी शोध की संभावनाओं का उल्लेख किया। आईआईटी आईएसएम की माइनिंग विशेषज्ञता को एआई से जोड़ते हुए उन्होंने खदानों में मौजूद जीवन-रूपों के विश्लेषण जैसे शोध की संभावना बतायी।

    उन्होंने भारतीय डेटा के अपने डेटाबेस तैयार करने और शोध परियोजनाओं से उत्पन्न डेटा को सुरक्षित तरीके से संरक्षित कर दूसरे शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराने की जरूरत बतायी।

    उन्होंने कहा कि एआई की तेज प्रगति के बीच मानव गरिमा की रक्षा करना भी जरूरी है। इसके लिए तकनीक के विकास के साथ नैतिक मानकों और सुरक्षा व्यवस्था के मजबूत ‘गार्डरेल्स’ तैयार करने होंगे।

    इनोवेशन से ही आगे बढ़ेगा देश : जे.डी. पाटिल

    कार्यक्रम में पहला संबोधन एलएंडटी के जे.डी. पाटिल ने किया। उन्होंने उन्नत विनिर्माण, महत्वपूर्ण धातुओं और नयी प्रक्रिया तकनीकों की बढ़ती जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बदलती तकनीकी दुनिया में उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग जरूरी है।

    शोध और उद्योग की जरूरतों को जोड़कर ही देश में स्वदेशी तकनीक और उन्नत विनिर्माण क्षमता विकसित की जा सकती है।
    इससे पहले आईआईटी आईएसएम के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने अतिथियों, विशेषज्ञों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों का स्वागत किया।

    उन्होंने संस्थान की 100 वर्षों की यात्रा और बदलते तकनीकी परिदृश्य में आईआईटी आईएसएम की भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, शिक्षाविद, शोधकर्ता, विद्यार्थी और अन्य प्रतिभागी मौजूद थे।