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धनबाद में 74 साल बाद भी बदहाली: पुल नहीं, तो 10 KM का सफर, बारिश में बंद हो जाती बच्चों की पढ़ाई

Published: Wed, 29 Jul 2026 12:49 PM (IST)

धनबाद के निरसा प्रखंड स्थित बेलटिकरी गांव में 74 साल बाद भी पुल और चापाकल जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव ...और पढ़ें

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HighLights

  1. बेलटिकरी गांव में 74 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव।

  2. पुल न होने से बच्चों की पढ़ाई और आवागमन बाधित।

  3. पेयजल के लिए चापाकल नहीं, ग्रामीण दाढ़ी-चुआं पर निर्भर।

जागरण संवाददाता, निरसा (धनबाद)। आजादी के 74 वर्ष बाद भी निरसा प्रखंड के बेलटिकरी गांव के ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कठिन जीवन जीने को मजबूर हैं।

सोनबाद और खुशरी पंचायत के अधीन आने वाले इस गांव के लोगों को प्रखंड मुख्यालय पहुंचने के लिए मात्र चार किलोमीटर की दूरी के बजाय करीब 10 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है।

इसकी मुख्य वजह गांव की जोरिया पर पुल का नहीं होना है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी विकट हो जाती है। जोरिया में पानी बढ़ से बच्चों का मध्य विद्यालय उदयपुर जाना मुश्किल हो जाता है।

मजबूरी में उन्हें करीब पांच किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है, जबकि कई बच्चे स्कूल जाना ही छोड़ देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुल बन जाने से न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि बच्चों की पढ़ाई भी बिना बाधा जारी रह सकेगी।

ग्रामीणों ने बताया कि दो पंचायतों में शामिल होने के बावजूद गांव में आज तक एक भी चापाकल नहीं लगाया गया है। पीने के पानी के लिए लोगों को दाढ़ी-चुआं का सहारा लेना पड़ता है।

उनका कहना है कि बरसात के दिनों में आवागमन और पेयजल दोनों की समस्या गंभीर रूप ले लेती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द पुल निर्माण और चापाकल की व्यवस्था करने की मांग की है।

खुशरी पंचायत के मुखिया सपन गोराई ने बताया कि जोरिया पर पुल निर्माण के लिए वरीय अधिकारियों से पत्राचार किया गया है। पुल बनने से ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा मिलेगी, बच्चों की शिक्षा प्रभावित नहीं होगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

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जोरिया पर पुल बन जाए तो गांव के लोगों को आने-जाने में काफी सहूलियत होगी। बच्चों की पढ़ाई भी नियमित होगी। सरकार को इस दिशा में जल्द कदम उठाना चाहिए।

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चायन राय, ग्रामीण

शिक्षा सभी का अधिकार है, लेकिन पुल नहीं होने से बरसात में हमारे बच्चों की पढ़ाई ठप हो जाती है।

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गीता राय, ग्रामीण

पुल के साथ गांव में चापाकल की भी व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि पेयजल और बच्चों की शिक्षा दोनों की समस्या दूर हो सके।

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कल्याणी राय, ग्रामीण

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