धनबाद में गिग वर्कर्स ने ठप किया काम, इंसेंटिव में कटौती और आईडी ब्लॉक करने पर जताया विरोध
धनबाद में क्विक कॉमर्स डिलीवरी ऐप के गिग वर्कर्स ने इंसेंटिव में कटौती और शोषणकारी नीतियों के खिलाफ काम ठप कर दिया है। ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड तस्वीर
HighLights
गिग वर्कर्स ने इंसेंटिव कटौती और शोषण के खिलाफ काम रोका।
14-16 घंटे काम के बदले कम कमाई का आरोप।
स्थानीय प्रबंधकों पर आईडी ब्लॉक करने का आरोप।
जागरण संवाददाता, धनबाद। कोयलांचल धनबाद में क्विक कॉमर्स डिलीवरी ऐप के स्थानीय प्रबंधन और उनके शोषणकारी नीतियों के खिलाफ गिग वर्कर्स ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को शहर के करीब 100 से अधिक पीड़ित स्टाफ और गिग वर्कर्स ने अपनी मांगों को लेकर काम पूरी तरह ठप कर दिया है।
कड़कड़ाती धूप और भीषण गर्मी के बीच सड़क पर उतरे इन युवाओं का कहना है कि लगातार पेट्रोल के बढ़ते दामों के बावजूद कंपनी उनका इंसेंटिव बढ़ाने के बजाय उसे कम कर रही है जिससे उनके सामने भुखमरी की नौबत आ गई है।
इंसेंटिव के नाम पर मात्र 145 रुपये
मौके पर मौजूद पीड़ित स्टाफ राजा हसन ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि पहले वे दिन में 12 से 14 घंटे ईमानदारी से काम करके 1100 से 1200 रुपये तक कमा लेते थे, जिससे परिवार का गुजारा सम्मानपूर्वक हो जाता था। लेकिन अब स्थितियां बदतर हो चुकी हैं।
अब पूरे दिन में 605 रुपये का आर्डर पूरा करने पर कंपनी इंसेंटिव के नाम पर मात्र 145 रुपये थमा रही है। इस जानलेवा गर्मी में सुबह आठ बजे से लेकर रात 10 बजे तक (14 से 16 घंटे) लगातार बाइक दौड़ाने के बाद भी जेब में 500 तक नहीं आ रहे हैं। कमाई का बड़ा हिस्सा तो केवल पेट्रोल और गाड़ी के मेंटेनेंस में ही निकल जाता है।
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आईडी ब्लॉक कर दी जा रही
प्रदर्शनकारी युवाओं ने स्थानीय मैनेजर विवेक कुमार और अभिषेक कुमार पर मानसिक प्रताड़ना और तानाशाही का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि जब वे इस अमानवीय कटौती के खिलाफ अपनी जायज मांगें लेकर जाते हैं तो मैनेजर सीधे तौर पर पल्ला झाड़ लेते हैं और कहते हैं कि सब कुछ ऊपर (कॉर्पोरेट) से तय होता है।
कहा हद तो तब हो जाती है जब शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठाने पर मैनेजरों द्वारा उनकी आईडी ब्लॉक कर दी जा रही है और नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही है।
16 घंटे की कमाई 1000
पीड़ित स्टाफ राजू ने मांग है कि इस कमरतोड़ महंगाई को देखते हुए उनके इंसेंटिव स्ट्रक्चर को तुरंत सुधारा जाए। 16 घंटे की हाड़-तोड़ मेहनत के बदले उन्हें कम से कम 800 से 1000 रुपये की दैनिक आमदनी सुनिश्चित की जाए ताकि वे इस झुलसाने वाली धूप में की गई अपनी मेहनत का सही हक पा सकें।
गिग वर्कर्स ने चेतावनी दी है कि मैनेजमेंट अपनी तानाशाही बंद करे अन्यथा शहर में कंपनी की सेवाएं पूरी तरह ठप कर दी जाएंगी। वहीं इस मामले में कंपनी के मैनेजर पूरी तरीके से चुप्पी साधे हुए हैं।