धनबाद में सरकारी दफ्तरों की होगी लाइव मॉनिटरिंग, वीडियो कॉल के जरिए होगी अटेंडेंस
धनबाद जिले में 1 अगस्त से सरकारी कार्यालयों और योजनाओं की वीडियो कॉल आधारित निगरानी शुरू होगी। इससे स्कूलों, अस्पतालों, आंगनबाड़ी केंद्रों और राशन दुक ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर
HighLights
धनबाद में 1 अगस्त से वीडियो कॉल निगरानी प्रणाली लागू।
स्कूलों, अस्पतालों, राशन दुकानों सहित कई विभागों की निगरानी।
पारदर्शिता, जवाबदेही और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।
रविशंकर सिंह, धनबाद। जिले में सरकारी योजनाओं और कार्यालयों की निगरानी का तरीका जल्द ही पूरी तरह बदलने वाला है। जिला प्रशासन सभी प्रमुख विभागों में वीडियो कॉल आधारित मॉनिटरिंग एवं अटेंडेंस सिस्टम लागू करने की तैयारी में है।
जिले में एक अगस्त से इसकी शुरूआत हो जाएगी। इसके तहत स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, सरकारी अस्पताल, स्वास्थ्य उपकेंद्र, पंचायत, प्रखंड एवं अंचल कार्यालय, जन वितरण प्रणाली (राशन दुकान), मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), जल जीवन मिशन, ग्रामीण विकास, राजस्व समेत विभिन्न विभागों की ऑनलाइन निगरानी होगी।
किसी भी समय वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति के साथ योजनाओं की वास्तविक स्थिति की जांच की जा सकेगी।
संचालन व निगरानी के लिए बन रहा जन सुविधा केंद्र
इस पूरी व्यवस्था के संचालन के लिए जिला स्तर पर ई-अनुसमर्थन कोषांग का गठन किया जा रहा है। इसके नोडल पदाधिकारी उप विकास आयुक्त (डीडीसी) होंगे।
जिला प्रशासन की ओर से करीब 10 कंप्यूटर युक्त जनसुविधा केंद्र तैयार किए जा रहे हैं, जिनका निर्माण अंतिम चरण में है। यही से विभिन्न योजनाओं और कार्यालयों की लाइव मानिटरिंग होगी तथा जरूरत पड़ने पर लाभुकों का आनलाइन सत्यापन भी किया जाएगा।
कोषांग से योजनाओं की बढेगी गुणवत्ता
कोषांग का मुख्य उद्देश्य योजनाओं के क्रियान्वयन की उपयोगिता, गुणवत्ता और गति का आकलन करना है। साथ ही संस्थानों के संचालन, दैनिक कार्यों की गुणवत्ता, आम लोगों को मिल रहे लाभ तथा कर्मचारियों की उपलब्धता, कार्यकुशलता, व्यवहार, दक्षता और समयबद्धता की भी समीक्षा होगी। प्रत्येक सप्ताह शुक्रवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।
जिला प्रशासन द्वारा तैयार दिशा-निर्देश के अनुसार मानिटरिंग के दौरान रैंडम तरीके से दो से तीन योजनाओं, संस्थानों या कार्यालयों का चयन किया जाएगा।
संबंधित विभाग को इसकी सूचना एक दिन पहले दी जाएगी, ताकि जिम्मेदार पदाधिकारी और कर्मचारी निर्धारित समय पर वीडियो कान्फ्रेंस में मौजूद रहें। समीक्षा के दौरान संबंधित कार्यालय से जुड़े सभी आवश्यक अधिकारी एवं कर्मियों की उपस्थिति सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।
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दस्तावेज के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति, पोषाहार एवं अन्य सुविधाओं की जांच होगी। पंचायतों में पंचायत स्तरीय योजनाओं और पंचायत भवन के रखरखाव का मूल्यांकन किया जाएगा। राशन दुकानों में लाभुकों की उपस्थिति, खाद्यान्न भंडारण, वितरण, स्टाक एवं रेट चार्ट की जांच होगी।
सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता, बेड, लैब, ओपीडी रजिस्टर तथा डाक्टरों की उपस्थिति देखी जाएगी। स्कूलों में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति, पठन-पाठन, विद्यालय की व्यवस्था और अभिलेखों की समीक्षा होगी।
वहीं, ग्रामीण विकास, जल जीवन मिशन, आधारभूत संरचना, राजस्व और आजीविका योजनाओं के कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति का भी आनलाइन मूल्यांकन किया जाएगा।
यदि निरीक्षण के दौरान वित्तीय अनियमितता, घटिया कार्य, लापरवाही या किसी प्रकार की शिथिलता सामने आती है तो संबंधित विभाग को तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई और आवश्यक सुझाव दिए जाएंगे। प्रत्येक समीक्षा के बाद विस्तृत प्रगति प्रतिवेदन तैयार कर टीम लीडर, डीएमएफटी को उपलब्ध कराया जाएगा।
इस पहल से जिले की सभी सरकारी योजनाओं और संस्थानों की निगरानी अधिक प्रभावी होगी। योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी, जवाबदेही तय होगी और आम लोगों तक सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। -आदित्य रंजन, उपायुक्त