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    कतरास के केशलपुर में भीषण भू-धंसान, आधा दर्जन आवास जमींदोज, जमीन में पड़ी गहरी दरारें

    Updated: Sun, 19 Jul 2026 06:10 PM (IST)

    Dhanbad News: कतरास के केशलपुर मुंडा धौड़ा में रविवार सुबह भू-धंसान से करीब 60 फीट जमीन धंस गई, जिससे आधा दर्जन खाली आवास जमींदोज हो गए। ...और पढ़ें

    भू-धंसान के बाद ध्वस्त घरों को देखता एक ग्रामीण। (फोटो जागरण)

    भू-धंसान के बाद ध्वस्त घरों को देखता एक ग्रामीण। (फोटो जागरण)

    HighLights

    1. केशलपुर मुंडा धौड़ा में 60 फीट जमीन धंसी, आवास जमींदोज।

    2. कोई हताहत नहीं, पर लोगों में दहशत, दरारें पड़ीं।

    3. कोलियरी प्रबंधन ने लिया जायजा, कतरी नदी का जलस्तर बढ़ा।

    संवाद सहयोगी, कतरास (धनबाद)। झरिया कोयलांचल में भूमिगत आग और भूधंसान की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। रविवार सुबह एक बार फिर भूधंसान की घटना हुई। कतरास के केशलपुर मुंडा धौड़ा में सुबह करीब साढ़े सात बजे तेज आवाज के साथ लगभग 60 फीट व्यास में जमीन धंस गई।

    इस घटना में करीब आधा दर्जन खाली आवास जमींदोज हो गए, जबकि आसपास की जमीन में भी दरारें पड़ गईं। हालांकि घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन समीप रहने वाले लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।

    घटना के समय आस पास के लोग अपनी-अपनी आवासों से निकाल कर चिल्लाने लगे। जिसकी आवाज सुनकर कतरी नदी के दूसरी छोर पर स्थित धान मील, पंजाबी मोहल्ला से लोग जुट गए। लोगों ने घटना की सूचना कोलियरी प्रबंधन एवं रामकनाली ओपी पुलिस को दी।

    घटना में कुछ आवासों में रखा सामान भी जमींदोज हो गया। जिन लोगों का सामान अभी तक खाली आवासों में रखा था, उनका काफी नुकसान हुआ। जिनके खाली आवास थे, उनमें अनवर अंसारी, गीता देवी, राजू गुप्ता, विंदा देवी सहित अन्य शामिल हैं।

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    इन लोगों को रामकनाली कोलियरी कार्यालय के समीप घर बनाने के लिए जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है। कुछ लोगों ने वहां घर बना लिया है, जबकि कुछ के मकान निर्माणाधीन हैं।

    सूचना मिलते ही एकेडब्ल्यूएमसी (AKWMC) कोलियरी के सहायक प्रबंधक रामनरेश कुमार, ओवरमैन सतीश चंद्र विद्यार्थी, गोवर्धन महतो, रियाज अहमद तथा सीआईएसएफ के जवान घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद भूधंसान स्थल के चारों ओर लाल फीता लगाकर क्षेत्र को घेर दिया गया, ताकि कोई भी व्यक्ति उस ओर न जा सके।

    भूधंसान की घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया और वे जनप्रतिनिधियों को कोसने लगे। स्थानीय लोगों ने बताया कि पांच सितंबर को इसी स्थान पर चार बार भूधंसान की घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें एक दर्जन से अधिक लोग बेघर हो गए थे।

    भूधंसान स्थल से कुछ ही दूरी पर कतरी नदी और हनुमान मंदिर स्थित हैं। पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है, जो खदान के लिए खतरा पैदा कर रहा है। कुछ दिन पहले गजलीटांड़ क्षेत्र में कतरी नदी का पानी अवैध उत्खनन स्थल में घुस गया था।