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    धनबाद में डोर स्टेप डिलीवरी एजेंसी फेल, 1000 से अधिक स्कूलों मिड-डे मील बंद

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 07:27 AM (IST)

    धनबाद में डोर स्टेप डिलीवरी एजेंसी की लापरवाही के कारण 1000 से अधिक सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) बंद हो गया है। ...और पढ़ें

    चावल की आपूर्ति बाधित होने से धनबाद के स्कूलों में एमडीएम प्रभावित। (प्रतीकात्मक फोटो)

    चावल की आपूर्ति बाधित होने से धनबाद के स्कूलों में एमडीएम प्रभावित। (प्रतीकात्मक फोटो)

    HighLights

    1. धनबाद के 1000 से अधिक स्कूलों में एमडीएम बंद।

    2. डोर स्टेप डिलीवरी एजेंसी की लापरवाही मुख्य कारण।

    3. लगभग एक लाख बच्चे मध्याह्न भोजन से वंचित।

    आशीष सिंह, धनबाद। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों की थाली से दोपहर का निवाला गायब हो गया है। जिले में पीएम पोषण यानी मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। लगातार चावल की किल्लत की खबरें सामने आ रही हैं और इसका मुख्य कारण डोर स्टेप डिलीवरी संभालने वाली एजेंसी की घोर लापरवाही है।

    बीआरसी (प्रखंड संसाधन केंद्र) और गोदामों में पर्याप्त अनाज मौजूद होने के बावजूद यह स्कूलों तक नहीं पहुंच पा रहा है। नतीजे के तौर पर जिले के एक हजार से अधिक प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में एमडीएम का संचालन पूरी तरह ठप हो चुका है।

    स्थिति कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा केवल धनबाद प्रखंड के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। धनबाद प्रखंड में कुल 167 प्राथमिक स्कूलों में एमडीएम संचालित होता है। गुरुवार तक मात्र 46 स्कूलों में ही चावल पहुंचाया जा सका। शेष 121 स्कूलों के बच्चे दोपहर के भोजन से वंचित रहे। यह स्थिति कई दिनों से यही है।

    जिले के लगभग 1700 सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना चलाई जाती है। यहां अध्ययनरत एक लाख 52 हजार 248 छात्र हर दिन भोजन करते हैं। इनमें से लगभग एक लाख छात्र एमडीएम से पिछले कई दिनों से वंचित हो रहे हैंं।

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    सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन के लिए छात्र संख्या के आधार पर चावल का आवंटन होता है। पहली से पांचवीं के लिए प्रति छात्र 100 ग्राम और छठी से आठवीं के लिए प्रति छात्र 150 ग्राम चावल निर्धारित है।

    मिड डे मील योजना के तहत प्रति छात्र कुकिंग कास्ट प्राथमिक स्तर (पहली से पांचवीं) के लिए 6.78 रुपये और उच्च प्राथमिक स्तर (छठी से आठवीं) के लिए 10.17 रुपये तय है।

    नियमों की अनदेखी, छोटी गाड़ियों से डिलीवरी बनी मुख्य वजह

    भारतीय खाद्य निगम के गोदाम से अनाज उठाकर सीधे स्कूलों तक पहुंचाने का जिम्मा साधु एंटरप्राइजेज गोविंदपुर को सौंपा गया है। नियमों के तहत एजेंसी को बड़ी गाड़ियों का इस्तेमाल कर समय पर सप्लाई सुनिश्चित करनी थी, लेकिन एजेंसी भारी लापरवाही बरत रही है।

    बड़ी गाड़ियों की जगह छोटी गाड़ियों से सप्लाई की जा रही है। यह भी नियमित नहीं है। एक गाड़ी में केवल 20 से 22 क्विंटल चावल ही आ पा रहा है। इससे एक दिन में बहुत कम स्कूलों तक डिलीवरी हो पा रही है।

    प्रखंड स्तर पर चावल उपलब्ध होने के बावजूद स्कूलों तक न पहुंचना सीधे तौर पर एजेंसी की कार्यशैली पर सवाल उठाता है।

    बच्चों की उपस्थिति पर भी असर

    सरकारी स्कूलों में आने वाले अधिकतर बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से आते हैं। कई बच्चों के लिए स्कूल में मिलने वाला यह मध्याह्न भोजन ही दिन का मुख्य और पौष्टिक आहार है। भोजन बंद होने के कारण स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है।

    कुपोषण से निपटने के लिए शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य ही एजेंसी की सुस्ती के कारण दम तोड़ रहा है।

    साधु एंटरप्राइजेज की लापरवाही हमारे संज्ञान में है। इनकी लापरवाही की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। पूर्व में भी दो-तीन बार चेतावनी देकर व्यवस्था सुधारने का निर्देश दिया गया था। अब एजेंसी को अंतिम रूप से एक सप्ताह का समय दिया गया है। यदि एक सप्ताह के अंदर सप्लाई व्यवस्था सुचारू नहीं होती है तो संबंधित एजेंसी का अनुबंध रद कर किसी अन्य एजेंसी को डोर स्टेप डिलीवरी का काम सौंप दिया जाएगा।

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    शालिनी डुंगडुंग, जिला शिक्षा अधीक्षक धनबाद