ये क्या हाल हो गया धनबाद नगर निगम का! बोर्ड बैठक में विकास पर चर्चा की जगह हंगामा, मेयर रहे मौन
Dhanbad Municipal Corporation बोर्ड की तीसरी की बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। ...और पढ़ें

नगर आयुक्त आशीष गंगवार, मेयर संजीव सिंह, विधायक राज सिन्हा और डिप्टी मेयर अरूण चाैहान। (फोटो जागरण)
HighLights
धनबाद नगर निगम की बोर्ड बैठक हंगामे की भेंट चढ़ी।
पार्षदों ने विकास कार्यों की अनदेखी पर बैठक का बहिष्कार किया।
कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा अधूरी रह गई।
जागरण संवाददाता, धनबाद। नगर निगम धनबाद की शनिवार को आयोजित तीसरी बोर्ड की बैठक भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई। विकास कार्यों की अनदेखी, सफाई कर्मियों की संख्या में कमी, अधिकारों की अनदेखी और अधिकारियों की प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर वार्ड पार्षदों में काफी आक्रोश रहा।

बैठक के दौरान इस कदर गुस्सा फूटा कि करीब डेढ घंटे तक चली तीखी बहस के बाद पार्षदों ने बैठक का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया और बैठक हाल से बाहर निकल गए।
पार्षदों का कहना है कि पिछले दो बोर्ड की बैठक में जो मुद्दा पास हुआ था उनपर अब तक काम नहीं हुआ। जिससे योजनाएं धरातल पर नहीं उतर सकी। वार्डों में स्वीकृत 15 सफाई कर्मियों की जगह 13 उपलब्ध कराया गया।
जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र समय पर न बनने से जनता का आक्रोश पार्षदों को झेलना पड़ रहा हैं। किसी भी अंचल में सहायक नगर आयुक्त नहीं बैठते हैं। जिससे दैनिक कार्यों में देरी हो रही है।
पार्षदों का आरोप था कि उन्हें उनके वार्ड में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त अधिकार और महत्व नहीं दिया जा रहा है। पार्षदों का आरोप था कि उन्हें उनके वार्ड में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त अधिकार और महत्व नहीं दिया जा रहा है।
नगर निगम के अधिकारियों पर मनमानी करने तथा जनहित के मुद्दों को नजर अंदाज करने का आरोप समेत अन्य समस्याओं को लेकर पार्षदों में नाराजगी रही और उन्होंने बैठक का बहिष्कार कर दिया।
हालांकि इस पूरे प्रकरण के दौरान नगर आयुक्त आशीष गंगवार ने पार्षदों को समझाने का प्रयास किया बावजूद इसके पार्षद नहीं माने और अपने मुद्दों को लेकर हंगामा करने लगे। वहीं बोर्ड के चेयरमेन व मेयर संजीव सिंह मौन होकर पार्षदों की बात सुनते रहे। बैठक के दौरान विधायक राज सिन्हा भी मौजूद थे।
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देरी से शुरू हुई बैठक, शुरुआत से ही तनाव
निर्धारित समय से करीब 45 मिनट की देरी से बैठक शुरू हुई। बैठक कक्ष मेयर व नगर आयुक्त के पहुंचते ही वार्ड पार्षदों ने विरोध जताया। हालांकि नगर आयुक्त के आग्रह के बाद मामला थोड़ी देर शांत रहा लेकिन थोड़ी बाद ही बैठक का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
एक-एक कर पार्षदों ने अपनी नाराजगी जतानी शुरू कर दी। पार्षदों का सीधा आरोप था नगर निगम पार्षदों की नहीं सून रहा हैं और जनप्रतिनिधियों की आवाज को दबाया जा रहा है। इसके बाद धीरे-धीरे पूरा बैठक तनाव पूर्ण हो गया।
कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा रह गई अधूरी
नगर निगम बोर्ड की बैठक बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। क्योंकि इसी बैठक में पार्षदों की सहमति से विकास योजनाओं को मंजूरी दी जाती है और उन्हें धरातल पर लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
लेकिन शनिवार की बोर्ड की तीसरी बैठक में हंगामे और विरोध के कारण नई योजनाओं और कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा अधूरी रह गई। जिससे कई लंबित योजनाओं के भविष्य पर फिलहाल सवाल खड़े हो गए हैं।
शनिवार को बोर्ड की बैठक में नए प्रस्ताव वैकट हाल, विभिन्न वार्डों में लाइट, नाली, व्यवसायिक भवन समेत कई योजनाओं पर चर्चा के बाद मुहर लगनी थी जो फाइलों में ही पड़ी रह गई।
बैठक में हंगामे और बहिष्कार की समीक्षा की जाएगी। आखिर ऐसी स्थित क्यों उत्पन्न हुई। सभी वार्ड पार्षदों से एक-एक कर बातचीत की जाएगी। जहां गलतियां होगी और जिसकी जिम्मेवारी होगी उसके खिलाफ कड़ा फैसला लिया जाएगा। जो भी योजनाएं बोर्ड से पास हुई है उन योजनाओं को पूरा किया जाएगा।
संजीव सिंह, मेयर, धनबाद नगर निगम
विकास योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाता है। फंड उपलब्ध नहीं होने के कारण कई योजनाएं प्रभावित हुई थीं, लेकिन अब फंड आने के बाद इन्हें गति देने की तैयारी थी। फिलहाल करीब 40 करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध हुआ है, जिसे अलग-अलग मदों में विकास कार्यों पर खर्च किया जाएगा।
आशीष गंगवार, नगर आयुक्त, धनबाद
बोर्ड की बैठक का बहिष्कार होना दुर्भाग्यपूर्ण है। आज काफी योजनाओं को पास करना था जो नहीं हो सका। बैठक के दौरान समन्वय की कमी रही। नाली सफाई, स्ट्रीट लाइट व पांच-पांच योजनाएं पार्षदों से मांगी गई थी। हम भी महसूस कर रहे है जो उम्मीद नगर निगम से थी उसे जिस तेजी से होना चाहिए था वह नहीं हो पाया। फंड की कमी है इसके लिए सरकार पूरी तरह से जिम्मेवार है।
राज सिन्हा, विधायक, धनबाद