धनबाद में एमडीआर टीबी का क्रांतिकारी इलाज, बी-पालम पद्धति से अब 6 माह में पूर्ण स्वस्थ
धनबाद में मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट टीबी (एमडीआर टीबी) के मरीजों के लिए 'बी-पालम' नामक नई और प्रभावी चिकित्सा पद्धति शुरू की गई है। ...और पढ़ें

'बी-पालम' चिकित्सा पद्धति से टीबी का इलाज। (प्रतीकात्मक फोटो)
डा. मोहन गोप, धनबाद। राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट टीबी (एमडीआर) के मरीजों के लिए जीवनदायिनी कदम उठाया गया है। धनबाद में अब नई और बेहद प्रभावी 'बी-पालम' चिकित्सा पद्धति की शुरुआत कर दी गई है।
इस नई व्यवस्था के लागू होने से गंभीर टीबी मरीजों को अब सालों लंबे इलाज, दर्जनों कड़वी दवाओं और रोज-रोज के दर्दनाक इंजेक्शनों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत देश भर में यह सेवा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से शुरू की है। टीबी के मरीजों के लिए यह वरदान साबित होगा।
सिर्फ 6 महीने का कोर्स और 4 दवाएं
पहले एमडीआर टीबी के मरीजों को ठीक होने में 18 से 24 माह का लंबा समय लगता था। इस दौरान उन्हें लगभग आठ अलग-अलग प्रकार की दवाइयां और नियमित इंजेक्शन लेने पड़ते थे। ऐसे में मरीजों को कई गंभीर साइड इफेक्ट्स भी होने लगते थे।
कई मरीज दवा बीच में ही छोड़ देते थे। लेकिन अब 'बी-पालम' पद्धति के तहत मरीजों का इलाज मात्र 6 महीने में पूरा हो जाएगा। इस नए नियम में मरीजों को इंजेक्शन नहीं लगवाना होगा, बल्कि उन्हें केवल चार दवाएं ही खानी होंगी।
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बेडाक्विलाइन, प्रेटोमैनिड, लिनेजोलिड और मोक्सीफ्लोक्सासिन चार दवा ही अब खानी है। पहले मरीज को आइसोनियाज़िड, रिफैम्पिसिन, पाइराज़ीनामाइड, एथेमबुटोल और स्ट्रेप्टोमाइसिन (इंजेक्शनेबल) खानी पड़ती थी, जो अब नहीं खानी है।
धनबाद में टीबी के 3400 और ड्रग रेसिस्टेंट के 110 मरीज
जिला यक्ष्मा विभाग की मानें तो धनबाद में टीबी के कुल 3,400 हैं। इनमें से 110 मरीज ऐसे हैं, जो ड्रग रेसिस्टेंट यानी गंभीर श्रेणी के टीबी से पीड़ित हैं।
इन सभी नए ड्रग रेसिस्टेंट मरीजों को अब इस नई बी-पालम चिकित्सा पद्धति का सीधा लाभ दिया जा रहा है, ताकि वे जल्द से जल्द स्वस्थ होकर समाज की मुख्यधारा में लौट सकें। इसके साथ मरीजों को निक्षय पोषण के तहत प्रति माह एक हजार रुपए भी दिए जा रहे हैं।
देश को टीबी मुक्त बनाना है। इसके तहत बी-पालम थेरेपी शुरू की गई है। कम समय का कोर्स होने के कारण अब मरीज बीच में इलाज नहीं छोड़ेंगे। जिससे टीबी के पूरी तरह ठीक होने की दर में भारी सुधार आएगा।
डा. आलोक विश्वकर्मा, सिविल सर्जन, धनबाद