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    डीवीसी में कथित घोटालों पर राज्यसभा सदस्य दीपक प्रकाश ने उठाए सवाल, ऊर्जा मंत्री से मांगी उच्चस्तरीय जांच

    Updated: Tue, 26 May 2026 05:54 PM (GMT+05:30)

    झारखंड से राज्यसभा सदस्य दीपक प्रकाश ने डीवीसी में वित्तीय अनियमितताओं और गलत नियुक्तियों की जांच के लिए केंद्रीय ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखा है। ...और पढ़ें

    दामोदर घाटनी निगम।

    दामोदर घाटनी निगम।

    HighLights

    1. राज्यसभा सदस्य दीपक प्रकाश ने डीवीसी जांच कमेटी गठन की मांग की।

    2. डीवीसी में वित्तीय अनियमितता और गलत नियुक्तियों के आरोप लगे।

    3. पूर्व चेयरमैन और मेंबर वित्त की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे।

    संजय बर्मन, पंचेत। झारखंड भाजपा के पूर्व अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य दीपक प्रकाश ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर को पत्र लिखकर डीवीसी में वित्तीय अनियमितता व गलत तरीके से नियुक्तियों की जांच के लिए कमेटी गठन करने की मांग की है। इससे डीवीसी में हड़कंप मच गया है।

    Deepak Prakash

    मालूम हो कि डीवीसी के पूर्व मुख्य अभियंता एके जैन ने सांसद दीपक प्रकाश को पत्र लिखकर डीवीसी के चेयरमैन एस सुरेश कुमार व तत्कालीन मेंबर वित्त अरूप सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि डीवीसी में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई कि अप्रैल में कर्मचारियों को पेमेंट देने के लिए बैंकों से शार्ट टर्म लोन लेना पड़ा। साथ ही इंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (इआरपी) को हटा कर सैप सिस्टम अपनाया है। इसके कारण डीवीसी अपने ग्राहकों को बिल नहीं भेज सका है।

    उन्होंने आरोप लगाया कि जिस डेलाइट कंपनी को डीवीसी के वित्तीय हालात सुधारने का जिम्मा सौंपा गया है उसमें पूर्व मेंबर फाइनेंस अरूप सरकार ने अपने बेटे को नियोजन दिलवा दिया है। जिसकी जांच करने की जरूरत है। वहीं डीवीसी अध्यक्ष ने वर्ष 2026 में बिना मंजूरी के सीनियर मैनेजर रिन्यूबल एनर्जी में एम पांच लेबल पद पर उत्पल गोस्वामी की नियुक्ति कर दी है। जबकि वर्ष 2024 में उन्हें संविदा के आधार पर नियुक्ति किया गया था।

    इसके अलावा डीवीसी अध्यक्ष ने अपने करीबी अनन्या दत्ता चौधरी को नियमों का उल्लंघन कर सीनियर मैनेजर मानव संसाधन में नियुक्ति कर दी है। इसी तरह डीवीसी के कांट्रैक्ट प्रोसेस में गड़बड़ी करते हुए 74 वर्षीय दुर्गापुर के पूर्व मेयर दिलीप कुमार अगस्त्य को एक साल के लिए एसोसिएट कंसलटेंट (सिविल एडमिस्ट्रेशन) के रूप में नियुक्ति कर दिया गया है। जबकि जबकि डीवीसी के विज्ञापन में इस पद के लिए उम्र सीमा 65 वर्ष निर्धारित है। उनके गलत नियुक्ति से राजनीतिक असर पड़ सकता है।

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