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    अपशिष्ट जल से निकलेगा कीमती तांबा, IT(ISM) धनबाद की तकनीक को भारत सरकार का पेटेंट

    Updated: Sat, 01 Aug 2026 05:08 PM (IST)

    IIT(ISM) धनबाद ने अपशिष्ट जल से तांबा निकालने की एक अभिनव तकनीक का पेटेंट हासिल किया है। यह तकनीक औद्योगिक अपशिष्ट जल के उपचार और मूल्यवान धातुओं की र ...और पढ़ें

    भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (भारतीय खनि विद्यापीठ) धनबाद।

    भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (भारतीय खनि विद्यापीठ) धनबाद।

    HighLights

    1. IIT(ISM) धनबाद को अपशिष्ट जल से तांबा रिकवरी का पेटेंट मिला।

    2. यह तकनीक औद्योगिक जल उपचार और धातु पुनर्प्राप्ति में उपयोगी है।

    3. खनन प्रभावित क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

    जागरण संवाददाता, धनबाद। IIT(ISM) धनबाद शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है। संस्थान को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

    संस्थान के पर्यावरण विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर विपिन कुमार तथा उनके पीएचडी शोधार्थियों निशांत पांडेय और अंकुर सिंह को अपशिष्ट जल से तांबा (कापर) की रिकवरी से जुड़ी एक अभिनव तकनीक के लिए भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने पेटेंट प्रदान किया है।

    अपशिष्ट जल से कैथोडिक विधि द्वारा तांबा प्राप्त करने के लिए एक इलेक्ट्रोकेमिकल रिएक्टर शीर्षक वाले इस आविष्कार के लिए 30 जुलाई 2026 को पेटेंट की मंजूरी मिली। यह तकनीक एक विशेष इलेक्ट्रोकेमिकल रिएक्टर के माध्यम से अपशिष्ट जल से तांबा निकालने में सक्षम है।

    इससे एक ओर औद्योगिक अपशिष्ट जल का पर्यावरण के अनुकूल उपचार संभव होगा, वहीं दूसरी ओर मूल्यवान धातुओं की रिकवरी भी की जा सकेगी। यह तकनीक विशेष रूप से खनन प्रभावित क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकती है। जहां अपशिष्ट जल में भारी धातुओं का प्रदूषण एक बड़ी चुनौती है।

    जैव-इलेक्ट्रोकेमिकल प्रक्रिया के जरिए संसाधनों की पुनर्प्राप्ति को बढ़ावा देने वाली यह तकनीक सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी। इस उपलब्धि पर प्रो. विपिन कुमार ने कहा कि यह पेटेंट कई वर्षों की मेहनत, निरंतर शोध और धैर्य का परिणाम है।

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    पेटेंट प्राप्त करने की प्रक्रिया काफी चुनौतीपूर्ण रही, जिसमें हर चरण पर हमें अपनी तकनीक की नवीनता और वैज्ञानिक उपयोगिता को साबित करना पड़ा। हमें खुशी है कि हमारे शोध को अब आधिकारिक मान्यता मिली है। हमें उम्मीद है कि यह तकनीक विशेषकर खनन प्रभावित क्षेत्रों में अपशिष्ट जल प्रबंधन और संसाधनों की रिकवरी के लिए उपयोगी साबित होगी।

    संस्थान के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने इस उपलब्धि पर प्रो. विपिन कुमार और उनकी शोध टीम को बधाई देते हुए कहा कि 'यह पेटेंट समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान की दिशा में संस्थान में हो रहे गुणवत्तापूर्ण शोध का प्रमाण है।

    पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए इस तरह की तकनीकों की आज बेहद आवश्यकता है।
    प्रो. विपिन कुमार पर्यावरण माइक्रोबायोलाजी, सालिड वेस्ट मैनेजमेंट, वेस्ट से रिसोर्स रिकवरी, माइक्रोबियल इलेक्ट्रोकेमिकल सिस्टम, रेस्टोरेशन इकोलाजी तथा बायोलाजिकल वेस्टवाटर ट्रीटमेंट के क्षेत्र में विशेषज्ञ माने जाते हैं।

    यह नया पेटेंट आइआइटी आइएसएम की शोध एवं नवाचार यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है और सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा उद्योगों के लिए उपयोगी तकनीकों के विकास के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।