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    झारखंड विधानसभा की प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण समिति के लपेटे में धनबाद उपायुक्त, विशेषाधिकार हनन की अनुशंसा

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 07:47 AM (IST)

    Dhanbad News: झारखंड विधानसभा की समिति ने रैयतों के लंबित भूमि मामलों पर धनबाद प्रशासन और बीसीसीएल की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। ...और पढ़ें

    धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन। (फाइल फोटो)

    धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन। (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. समिति ने रैयतों के लंबित भूमि मामलों पर जताई कड़ी नाराजगी।

    2. धनबाद उपायुक्त के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की अनुशंसा का निर्णय।

    3. सभी विभागों को 15 दिनों में कार्रवाई रिपोर्ट देने का निर्देश।

    जागरण संवाददाता, धनबाद। बीसीसीएल क्षेत्र में रैयती जमीन पर अवैध ओवरबर्डन (ओबी) डंपिंग, रैयतों को मुआवजा, जमीन की नापी, सीएनटीओ अनुमति और अन्य लंबित मामलों को लेकर गठित झारखंड विधानसभा की प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण समिति ने जिला प्रशासन और बीसीसीएल की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है।

    समिति ने कहा कि करीब तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी रैयतों को उनका अधिकार नहीं मिल सका है। संबंधित विभागों के सहयोग के अभाव में मामलों का समाधान लगातार टल रहा है। साथ ही 20 सितंबर 2025 को समिति द्वारा दिए गए लिखित निर्देशों पर भी अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

    इसे गंभीर मानते हुए समिति ने गुरुवार को मामला विधानसभा अध्यक्ष के संज्ञान में भेजने और उपायुक्त के खिलाफ विशेषाधिकार हनन (अवमानना) की अनुशंसा करने का निर्णय लिया है। समिति ने सभी विभागों को 15 दिनों के भीतर लंबित मामलों पर कार्रवाई कर प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया है। अगली समीक्षा बैठक चार अगस्त को सभापति कक्ष में होगी।

    बुधवार को समिति के सभापति मथुरा महतो की अध्यक्षता में हुई बैठक में सदस्य अरूप चटर्जी, चंद्रदेव महतो, धनंजय सोरेन और राज सिन्हा सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

    बैठक में जिला प्रशासन, खान सुरक्षा महानिदेशालय, जिला खनन पदाधिकारी, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद, बीसीसीएल, ईसीएल, डीवीसी, एमपीएल, टाटा स्टील और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे। हालांकि धनबाद के उपायुक्त लगातार बैठक में शामिल नहीं हुए, जिस पर समिति ने कड़ी आपत्ति जताई।

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    समिति ने बताया कि 10 नवंबर 2025, चार दिसंबर 2025, 12 दिसंबर 2025 और अब ताजा बैठक बुधवार को हुई जिसमें भी उपायुक्त अनुपस्थित रहे। बैठक में यह भी कहा गया कि सिंदरी विधायक द्वारा विधानसभा में उठाए गए प्रश्न के आधार पर इस समिति का गठन किया गया था।

    प्रश्न उठने के आठ महीने बाद भी मामले में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। समिति ने इसके लिए संबंधित विभागों के अपेक्षित सहयोग के अभाव को जिम्मेदार बताया। समिति ने उपायुक्त को निर्देश दिया कि सीएनटीओ अनुमति से जुड़े सभी लंबित आवेदनों का 15 दिनों के भीतर निष्पादन किया जाए।

    रैयतों की ओर से दिए गए 59 और 75 लंबित आवेदनों पर अब तक स्पष्ट प्रतिवेदन नहीं मिलने पर भी नाराजगी जताई गई। समिति ने सभी मामलों में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

    बैठक में उपायुक्त की ओर से जानकारी दी गई कि बीसीसीएल के क्षेत्र-9, क्षेत्र-10 और क्षेत्र-11 की जमीन की तकनीकी माध्यम से नापी कराई जाएगी, जिसका पूरा खर्च बीसीसीएल वहन करेगा। बीसीसीएल अधिकारियों ने इस प्रस्ताव पर सहमति दी। समिति ने निर्देश दिया कि नापी के बाद रैयती, सरकारी और वन भूमि का स्पष्ट सीमांकन किया जाए।

    समिति ने लोदना क्षेत्र-10 तथा एटी देव प्रभा द्वारा बलियापुर के सुरुंगा और झरिया के भौरा क्षेत्र में रैयती जमीन पर जबरन ओवरबर्डन डंपिंग का मामला भी गंभीरता से उठाया। समिति के अनुसार इससे सरकारी तालाब, सड़क और विद्यालय जैसी सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है, लेकिन न तो प्रभावी रोक लगी और न ही प्रभावित रैयतों को उचित मुआवजा मिला।

    समिति ने जमीन की नापी कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके अलावा समिति ने कहा कि बीसीसीएल द्वारा जितनी सरकारी जमीन का उपयोग किया गया है, उसका निर्धारित राजस्व सरकार के खजाने में जमा होना चाहिए।

    वर्ष 2023 से लंबित इस मामले पर समिति ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि डीवीसी और बीसीसीएल समान प्रतिशत के अनुसार राशि जमा कर रहे हैं तो संबंधित फाइल अब तक लंबित क्यों है।

    अब तक हुई आठ बैठकों में उपायुक्त केवल दो बार शामिल हुए हैं। उनकी अनुपस्थिति के कारण जमीन के नामांतरण, रैयतों के अधिकार और मुआवजा से जुड़े मामलों में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। इसका असर केवल बीसीसीएल ही नहीं, बल्कि डीवीसी, एमपीएल और ईसीएल की कई परियोजनाओं पर भी पड़ रहा है।

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    अरूप चटर्जी विधायक (समिति सदस्य)/

    लगातार बैठकों में उपायुक्त की अनुपस्थिति के कारण रैयतों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों का समाधान नहीं हो पा रहा है। सभी विभागों को 15 दिनों के भीतर लंबित मामलों पर कार्रवाई कर प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया गया है। उपायुक्त की गैरहाजिरी को गंभीर मानते हुए विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष विशेषाधिकार हनन की अनुशंसा की जाएगी।

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    मथुरा महतो विधायक (सभापति, प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण समिति)//