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    IIT ISM धनबाद के संविदा कर्मियों को हाईकोर्ट से मिली राहत, नियमितीकरण का आदेश

    Updated: Fri, 10 Jul 2026 08:18 PM (IST)

    झारखंड हाईकोर्ट ने IIT ISM धनबाद के 20 साल से कार्यरत संविदा कर्मियों को नियमित करने का आदेश दिया है। ...और पढ़ें

    झारखंड हाई कोर्ट और आइआइटी (आइएसएम) धनबाद।(फाइल फोटो)

    झारखंड हाई कोर्ट और आइआइटी (आइएसएम) धनबाद।(फाइल फोटो)

    HighLights

    1. झारखंड हाईकोर्ट ने IIT ISM कर्मियों के नियमितीकरण का आदेश दिया।

    2. 20 साल से कार्यरत संविदा कर्मियों को मिलेगी राहत।

    3. आउटसोर्सिंग के दुरुपयोग पर रोक लगाने में अहम फैसला।

    जागरण संवाददाता, धनबाद। झारखंड उच्च न्यायालय ने आइआइटी आइएसएम के वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मियों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए संस्थान को उनकी सेवाएं नियमित करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकलपीठ ने कहा कि सरकारी संस्थान आउटसोर्सिंग की आड़ लेकर कर्मचारियों के नियमितीकरण के अधिकार को अनिश्चितकाल तक नहीं रोक सकते।

    मामला शक्ति नाथ महतो समेत सात कर्मियों से जुड़ा है। जिन्हें संस्थान के नियमित कर्मचारियों की मृत्यु के बाद अनुकंपा के आधार पर दैनिक वेतनभोगी के रूप में नियुक्त किया गया था। ये कर्मचारी वर्ष 2001 से 2017 तक दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्य करते रहे, बाद में उन्हें निजी एजेंसियों के माध्यम से आउटसोर्सिंग व्यवस्था में शामिल कर दिया गया।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सौरभ शेखर और अनुराग कुमार ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि कर्मचारी पिछले दो दशकों से तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के स्थायी प्रकृति के कार्य कर रहे हैं। ऐसे में आउटसोर्सिंग व्यवस्था का उपयोग कर्मचारियों को कम वेतन देने और उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित करने के लिए नहीं किया जा सकता।

    न्यायालय ने यह भी कहा कि 20 वर्षों तक सफलतापूर्वक सेवा देने के बाद प्रारंभिक शैक्षणिक योग्यता को आधार बनाकर नियमितीकरण से इनकार करना उचित नहीं है। हाईकोर्ट ने संस्थान को सभी याचिकाकर्ताओं की सेवाएं शीघ्र नियमित करने का आदेश दिया है। यदि नियमित पद उपलब्ध नहीं हों तो उनके समायोजन के लिए अधिसंख्य (सुपरन्यूमरेरी) पद सृजित करने का निर्देश भी दिया गया है।

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    साथ ही कर्मचारियों की पूर्व सेवा अवधि को सेवांत लाभों की निरंतरता के लिए मान्य करने को कहा गया है। इस फैसले को लंबे समय से सरकारी संस्थानों में कार्यरत संविदा और आउटसोर्स कर्मियों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा और आउटसोर्सिंग व्यवस्था के दुरुपयोग पर रोक लगाने की दिशा में अहम होगा।