17 KM का सफर, यूट्यूब से सेल्फ स्टडी; ICSE स्टेट टॉपर कौशिकी नासा में करना चाहती हैं काम
कौशिकी दत्ता ने आईसीएसई दसवीं बोर्ड परीक्षा में 99% अंक प्राप्त कर स्कूल में टॉप किया और राज्य के शीर्ष छात्रों में शामिल हुईं। ...और पढ़ें

कौशिकी को मिठाई खिलाते परिजन। (जागरण)
HighLights
कौशिकी दत्ता ने ICSE 10वीं में 99% अंक हासिल किए।
बिना ट्यूशन और 17 किमी सफर तय कर सफलता पाई।
आईआईटीयन बनकर नासा में काम करने का है सपना।
राहुल मिश्रा, चासनाला। मेहनत, अनुशासन व लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण क्या होता है, इसका जीता- जागता उदाहरण बनी हैं डिनोबिली स्कूल एफआरआई डिगवाडीह की छात्रा कौशिकी दत्ता।
आईसीएसई की दसवीं बोर्ड परीक्षा में 99 प्रतिशत अंक हासिल कर उन्होंने न केवल विद्यालय में टॉप किया। बल्कि राज्य के शीर्ष छात्रों में भी अपना स्थान पक्का कर लिया।
उनकी इस शानदार सफलता से स्कूल, परिवार व पूरे जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है। कौशिकी की सफलता का सफर आसान नहीं था।
वह पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के संथालडीह टाउनशिप से रोजाना करीब 17 से 18 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर स्कूल पहुंचती थीं।
बिना ट्यूशन के हासिल किया मुकाम
लगभग एक घंटे की यह दैनिक यात्रा उनके हौसले को कभी कमजोर नहीं कर सकी। पढ़ाई के प्रति उनकी लगन इतनी थी कि उन्होंने बिना किसी ट्यूशन के ही यह मुकाम हासिल किया।
कौशिकी के पिता कौशिक कुमार दत्ता हुगली जिले के बेडंल टाउनशिप में विद्युत विभाग में सहायक महाप्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। जबकि उनकी मां मौसमी दत्ता गृहिणी हैं।
इकलौती संतान होने के बावजूद कौशिकी ने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाकर अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित किया।
पढ़ाई के दौरान आने वाली समस्याओं को वह यूट्यूब की मदद से सुलझाती थीं। उनकी दिनचर्या भी बेहद अनुशासित रही। स्कूल से लौटकर थोड़ी देर आराम करने के बाद वह शाम सात बजे से लेकर रात डेढ़- दो बजे तक पढ़ाई करती थीं व सुबह भी दो घंटे नियमित अध्ययन करती थीं। यही निरंतरता उनकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बनी।
NASA में करना चाहती हैं काम
कौशिकी का सपना आईआईटियन बनकर नासा में काम करना है। अंतरिक्ष, सैटेलाइट व विज्ञान के रहस्यों को समझने में गहरी रुचि है।
पढ़ाई के साथ- साथ कौशिकी को जासूसी कहानियां पढ़ना, डांस करना, खाना बनाना व खेलों में हिस्सा लेना भी पसंद है। वह बॉस्केटबॉल व क्रिकेट की अच्छी खिलाड़ी भी हैं।
अपनी सफलता का श्रेय कौशिकी अपने माता- पिता व विद्यालय के शिक्षकों को देती हैं। उनका मानना है कि सही मार्गदर्शन व कड़ी मेहनत से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। कौशिकी की यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गई है।