'लुखी गो लुखी...' के गीतों से गूंजे खेत, एरोक पूजा के बाद संथाल समाज ने शुरू की धान रोपाई
Jharkhand Paddy Transplantationः निरसा में झमाझम बारिश के बाद धान रोपाई का कार्य तेज हो गया है, किसान खेतों में जुट गए हैं। ...और पढ़ें

निरसा में धान रोपाई करती महिलाएं। (फोटोः जागरण)
HighLights
निरसा में झमाझम बारिश के बाद धान रोपाई हुई तेज।
संथाल समुदाय एरोक पूजा के बाद धान रोपण करते हैं।
खेतों में गूंज रहे पारंपरिक रोपाई गीत, उत्साह का माहौल।
संवाद सहयोगी, निरसा (धनबाद)। कोयलांचल में दो दिन पूर्व हुई झमाझम बारिश के बाद निरसा क्षेत्र में धान रोपाई का कार्य तेज हो गया है। किसान खेतों की जुताई और रोपाई में जुट गए हैं, जबकि महिलाओं के पारंपरिक रोपाई गीतों से ग्रामीण इलाकों का माहौल जीवंत हो उठा है।
किसानों को अच्छी वर्षा और बेहतर फसल की उम्मीद
मिट्टी की सोंधी खुशबू, खेतों में काम करते किसान, रोपाई करती महिलाएं और मेड़ों पर खेलते बच्चों की चहल-पहल ग्रामीण जीवन की प्राकृतिक सुंदरता और कृषि संस्कृति को सजीव बना रही है। किसानों को अच्छी वर्षा और बेहतर फसल की उम्मीद है, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।
संथाल आदिवासी एरोक पूजा (धान रोपाई के शुभारंभ का पारंपरिक संथाली कृषि पर्व) मनाने के बाद ही धान रोपन का कार्य प्रारंभ करते हैं। इसमें आदिवासियों के पुजारी खेत में पहले पूजा अर्चना कर अच्छी फसल की कामना करते हैं। उसके बाद ही संथाल आदिवासी धान की रोपाई शुरू करते हैं।
संथाली समाज धान रोपाई करते समय लुखी गो लुखी काहां तो-हो-रो जोनोम, धुला माटी रे हो ह-मा-रो जोनोम। अर्थात लक्ष्मी माता तुम्हारा जन्म कहां हुआ है? जवाब में माता कहती है मेरा जन्म धूल मिट्टी में हुई है। लुखी गो लुखी काहां तो-हो-रो बसत,कामी करम रे हो ह-मा-रो बसत। अर्थात लक्ष्मी माता तुम कहां रहती हो? जवाब में माता कहती है जहां कर्म होता है मैं वहीं रहती हूं।
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पचाठी के बाद शुरू करते हैं धान रोपाई
आदिवासी समुदाय के अलावे दूसरे समुदाय के लोग धान की रोपाई शुरू करने के पूर्व पचाठी पूजा करते हैं। जिसमें गृह स्वामी धन धन के बिचड़े नर्सरी से लाकर अपने खेत में पांच पौधे लगाते हैं। उसके बाद विधिवत पूजा पाठ करने के बाद भगवान से अच्छी भारी एवं अच्छी उपज की कामना करते हैं।
उसके बाद ही धान की रोपाई शुरू होती है। धान की रोपाई करते समय महिलाएं खोरठा भाषा में सामूहिक रूप से धान रोपाई गीत आज सारा दिन कल सारा दिन,करलेय गो बादल। ओ लो बड़ सोई बरसोलेय पानी झोला झोल।हाथे लेब देतुन काठी, माथाई लेब धानेर गाछी। ओ दिदी बहीन सब चाला धान रोपे चासी। जैसे गीतों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान है।
कृषक मित्र रमेश चंद्र महतो ने बताया कि धान की रोपाई लगभग 10 दिन बाद हो रही है। फिर भी यदि नियमित बारिश होती रही तो अच्छी उपज हो सकती है।