निशा भगत को आत्महत्या के लिए किसने किया मजबूर? सवाल उठाते हुए विधायक जयराम महतो ने दी अंतिम जोहार
Nisha Bhagat Suicide: आदिवासी नेत्री निशा भगत ने रांची में आत्महत्या कर ली, जिससे राजनीतिक और सामाजिक हलकों में कई सवाल उठ खड़े हुए हैं।

निशा भगत और जयराम महतो। (फाइल फोटो)
HighLights
आदिवासी नेत्री निशा भगत ने रांची में की आत्महत्या।
विधायक जयराम महतो ने निष्पक्ष जांच की मांग की।
घटना ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में सवाल खड़े किए।
जागरण संवाददाता, धनबाद। आदिवासी नेत्री और सरना-सनातन का पक्ष मुखरता से रखने वाली निशा भगत ने शुक्रवार को रांची में आत्महत्या कर ली। इस घटना ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर किन परिस्थितियों में निशा भगत को यह आत्मघाती कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा?
इस मामले को लेकर विधायक जयराम महतो ने सवाल उठाते हुए घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है। निशा भगत की मौत के पीछे की वजहों और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। घटना ने आदिवासी समाज में भी चिंता पैदा कर दी है। अब सभी की निगाहें मामले की जांच और सामने आने वाले तथ्यों पर टिकी हैं।
गुमला से लड़ा था विधानसभा चुनाव
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के टिकट पर निशा भगत ने 2024 का विधानसभा चुनाव गुमला से लड़ा था। हालांकि, उन्हें चुनाव में सफलता नहीं मिली।
कुर्मी आंदोलन के दौरान उन्होंने एक बयान दिया था, जिसे जेएलकेएम प्रमुख जयराम महतो ने अनुशासनहीनता माना था। बाद में निशा को जेएलकेएम से निष्कासित कर दिया गया था। निशा भगत के पार्टी में नहीं रहने के बावजूद डुमरी विधायक जयराम महतो ने उनकी मौत पर चिंता व्यक्त की है।
अंतिम जोहार निशा भगत जी
महतो ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है, "आज मन बेहद व्यथित और भारी है। झारखंड की संघर्षशील और प्रखर आदिवासी नेत्री निशा भगत जी के असमय निधन की खबर बेहद दुखद और हृदयविदारक है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि आदिवासी समाज की बेबाक और लड़ाकू बेटी जिंदगी की जंग हार गई? किसने उन्हें इतना मजबूर कर दिया कि उन्हें आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ा? सिस्टम से एक बड़ा सवाल छोड़ गई निशा बहन...."
आज मन बेहद व्यथित और भारी है. झारखंड की संघर्षशील और प्रखर आदिवासी नेत्री निशा भगत जी के असमय निधन की खबर बेहद दुखद और हृदयविदारक है. आखिर ऐसा क्या हुआ कि आदिवासी समाज की बेबाक और लड़ाकू बेटी जिंदगी की जंग हार गई ? किसने उन्हें इतना मजबूर कर दिया कि उन्हें आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ा ? सिस्टम से एक बड़ा सवाल छोड़ गई निशा बहन. निशा भगत जी हमारी पार्टी की नेत्री रही थीं. पार्टी ने उन्हें गुमला से अपना उम्मीदवार बनाकर सम्मान दिया था. उनके भीतर अन्याय के खिलाफ लड़ने का मजबूत जज्बा था. उनका इस तरह असमय दुनिया से चले जाना झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है. सबसे ज्यादा पीड़ा इस बात की है कि आत्महत्या से पहले वह अपने फेसबुक लाइव पर रोते हुए थानेदार को फोन कर रही थीं इसके बावजूद यदि उनकी पुकार को गंभीरता से नहीं लिया गया. झारखंड की जनता अफसरशाही, अधिकारियों की मनमानी और लापरवाही से त्रस्त है. फेसबुक लाइव में निशा भगत जी ने जिन-जिन लोगों के नाम लिए हैं, उसके खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तार करें. सरकार, झारखंड पुलिस और जमीन दलालों पर लगाए गए गंभीर आरोपों की भी गहराई से जांच हो. दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए. दुख की बात है कि अपने ही समाज के बेटी और बहू को समाज के कुछ कथित ठेकेदारों और दलालों द्वारा बार-बार सार्वजनिक रूप से ताने देकर अपमानित करने, चरित्र पर सवाल उठाने और झूठे आरोप लगाकर बदनाम करते है. आखिर कब तक हमारी बेटियां अपमान और प्रताड़ना सहती रहेंगी ? आज रांची ही नहीं, पूरे झारखंड में आदिवासी जमीन की लूट का खेल चल रहा है. राज्य में जमीन दलालों के हौसले बुलंद हैं. आदिवासियों की जमीन और उनके अधिकारों पर लगातार खतरा मंडरा रहा है. निशा भगत जी द्वारा लगाए गए आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. आज 26 साल बीत जाने के बाद सरकार सरकारी जमीन को बचाने का लिए एक कानून नहीं बना सकी है. इस बीच कई मुख्यमंत्री आए और चले गए लेकिन सरकारी भूमि के संरक्षण के लिए कोई स्पष्ट कानून तक नहीं बना पायी. झारखंड गठन के काल से हीं CNT/SPT क़ानून का उल्लंघन किया जा रहा है. निशा भगत के आत्महत्या प्रकरण की SIT गठन कर निष्पक्ष जांच के साथ केंद्रीय एजेंसी CBI से जाँच करवाने की मांग करता हूं, ताकि सच्चाई सामने आए और किसी भी दोषी को राजनीतिक संरक्षण या प्रभाव के कारण बचने का मौका न मिले. निशा जी आपकी आवाज, आपका संघर्ष और अन्याय के खिलाफ आपकी लड़ाई हमेशा याद रखी जाएगी. आपको न्याय मिले, सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी... अंतिम जोहार निशा भगत जी, शत-शत नमन एवं भावभीनी श्रद्धांजलि...
— Jairam Kumar Mahato MLA (@Tigerjairam) November 6, 2026
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