धनबाद को हाथियों के खौफ से मिलेगी राहत, टुंडी में 5 KM तक लगेगी सोलर फेंसिंग; छूते ही लगेगा झटका
धनबाद वन प्रमंडल ने टुंडी में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए 5 किमी सोलर फेंसिंग का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। ...और पढ़ें

HighLights
टुंडी में 5 किमी सोलर फेंसिंग का पायलट प्रोजेक्ट।
हाथियों को गांवों में घुसने से रोकेगा हल्का झटका।
चेकडैम और फलदार पौधे भी लगाए जा रहे हाथियों के लिए।
रविशंकर सिंह, धनबाद। जंगली हाथियों के गांवों में लगातार प्रवेश और मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए धनबाद वन प्रमंडल ने टुंडी के जंगल में तकनीक आधारित सोलर फेंसिंग लगाने की नई पहल शुरू की है।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत लगभग पांच किलोमीटर क्षेत्र में सोलर फेंसिंग लगाने का काम अंतिम चरण में है। इसके शुरू होने के बाद हाथियों के झुंडों को गांवों में प्रवेश करने से रोकने में काफी मदद मिलेगी।
धनबाद के जंगलों में अपनी तरह का यह पहला प्रयोग होगा। इससे एक ओर हाथियों का प्राकृतिक मार्ग सुरक्षित रहेगा, वहीं दूसरी ओर दर्जनभर गांवों को हाथियों के हमलों और नुकसान से राहत मिलने की उम्मीद है। पूर्व में ब्लिंकिंग लाइट व बीप साउंड के बाद इस तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है।
बिजली नहीं सोलर उर्जा से संचालित फेंसिंग
वन प्रमंडल पदाधिकारी विकास पालीवाल ने बताया कि सोलर फेंसिंग सामान्य बिजली की बाड़ नहीं है। सोलर ऊर्जा से संचालित यह प्रणाली अधिक वजन वाले जानवरों को हल्का करंट देती है। हाथी जैसे भारी जानवर जब फेंसिंग को छूते हैं, या उससे टकराते हैं तो उन्हें हल्का झटका महसूस होता है, जिससे वे पीछे हट जाते हैं और गांव की ओर नहीं बढ़ते।
वहीं गाय, भैंस, बकरी जैसे छोटे पशुओं पर इसका असर बेहद कम या लगभग नहीं के बराबर होता है। इससे वन्यजीवों और ग्रामीणों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
हाथियों के लिए चेकडैम व पौधरोपण पर जोर
धनबाद वन प्रमंडल ने केवल फेंसिंग पर ही भरोसा नहीं किया है, बल्कि हाथियों की पसंद के अनुरूप चेकडैम व उनके पसंदीदा फल-फूल के पौधे भी लगाने शुरू किए हैं। टुंडी में वन विभाग की ओर से बनाए चेकडैम हाथियों के लिए सुरक्षित बसेरा बनते जा रहे हैं। महज एक वर्ष में टुंडी में दर्जन भर चेकडैम बनाए गए हैं।वहीं, बांस, महुआ, ताड, अंजीर, केला, आम व कटहल के फलदार पौधे भी लगाने की कवायद जारी है।
टुंडी वन क्षेत्र हाथियों का प्राकृतिक आवास
टुंडी का वन क्षेत्र हाथियों का प्राकृतिक आवास माना जाता है। यहां अक्सर 35 से 40 हाथियों का झुंड कई दिनों तक डेरा डालता है। भोजन और पानी की तलाश में ये झुंड पर्वतपुर, बसहा सहित आसपास के गांवों में पहुंच जाते हैं, जिससे फसलों, मकानों और ग्रामीणों की सुरक्षा पर खतरा बना रहता है।
खबरें और भी
वहीं, वन विभाग की ओर से हाथियों के लिए सुविधाजनक व्यवस्था किए जाने से हाथी टुंडी वन क्षेत्र को सुरक्षित मानते हैं। साथ ही इस क्षेत्र में प्रजनन भी कर रहे हैं।
देश के कई राष्ट्रीय उद्यानों में इस तकनीक का सफल उपयोग हो चुका है। टुंडी में यह प्रयोग सफल रहा तो ग्रामीणों की सहमति से इसे अन्य वन क्षेत्रों में भी चरणबद्ध तरीके से लगाया जाएगा। हाथियों को गांव में घुसने से रोक कर उनके प्राकृतिक मार्ग से आगे के लिए रवाना किया जा सकेगा।- विकास पालीवाल, डीएफओ, धनबाद