यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 20, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Dhanbad News: SSP की बढ़ेगी मुश्किलें, दुर्व्यवहार मामले में केंद्रीय मानवाधिकार आयोग ने मांगा जवाब
धनबाद के कुसुंडा रेलवे तालाब के अस्तित्व को बचाने के लिए आंदोलन कर रहे दिनेश कुमार धारी के मामले में केंद्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ...और पढ़ें

HighLights
- कुसुंडा रेलवे तालाब के अस्तित्व को बचाने को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश ने चलाया था अभियान
- रेलवे पुलिस पर लगा था दुर्व्यवहार का आरोप
जागरण संवाददाता, धनबाद। कुसुंडा रेलवे तालाब के अस्तित्व को बचाने के लिए आंदोलन कर रहे दिनेश कुमार धारी के मामले में केंद्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है।
आयोग ने धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षक एचपी जनार्दनन को 8 हफ्ते में जांच करके इसकी रिपोर्ट मांगी है। दिनेश कुमार कुसुंडा रेलवे तालाब के अस्तित्व को बचाने को लेकर कुसुंडा रेलवे लाइन के पास आंदोलन कर रहे थे।
दिनेश का कहना है कि आंदोलन के दौरान धनबाद आरपीएफ इंस्पेक्टर पवन कुमार और जीआरपी थाना प्रभारी ललन कुमार आकर दुर्व्यवहार किया। दिनेश के अनुसार उन्होंने जाति सूचक गाली देते हुए मारपीट कर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को फेंक दिया। आसपास के लोगों ने इसकी वीडियो भी मोबाइल से बनाई।
लेकिन पद का दुरुपयोग करते हुए दोनों पदाधिकारी ने कई मोबाइल के वीडियो भी डिलीट करवा दिए। कुछ वीडियो बचे हुए हैं। फरवरी 2025 में दिनेश ने इसकी शिकायत मानव अधिकार आयोग और प्रधानमंत्री कार्यालय से की।
अब इस पर मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षक से जांच करने को कहा है।
डेढ़ लाख की आबादी तालाब पर निर्भर
कुसुंडा रेलवे तालाब लगभग 100 वर्ष पुराना है। दिनेश बताते हैं कि इस तालाब पर लगभग डेढ़ लाख की आबादी निर्भर है। लेकिन पिछले कई वर्षों से यहां आस-पास आउटसोर्सिंग कंपनियां खुल गई हैं और तालाब के पानी का उपयोग कर रही हैं।
स्थिति यह है कि तालाब का दायरा सिकुड़ कर काफी छोटा हो गया है। लगातार पानी निकालने की वजह से हर दिन तालाब सूखता जा रहा है। यही स्थिति रही तो इस तालाब का अस्तित्व पूरी तरीके से खत्म हो जाएगा। उन्होंने बताया कि बीसीसीएल और उसकी आउटसोर्सिंग कंपनियां जानबूझकर तालाब को सुखा रही हैं।
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