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    बुरी संगति से सज्जन भी दुर्जन बन जाता है, इसलिए सज्जनों की संगति आवश्यक : स्वामी बालकानंद गिरि

    By Prem Kumar Singh Edited By: Mritunjay Pathak
    Updated: Sat, 17 Jan 2026 11:50 PM (IST)

    Anand Peethadhishwar Acharya Mahamandaleshwar Swami Balkananand Giri: स्वामी बालकानंद गिरि महाराज ने गोविंदपुर में कहा कि अच्छी संगति से मूर्ख भी विवे ...और पढ़ें

    आनंद पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरि महाराज।

    आनंद पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरि महाराज।

    HighLights

    1. अच्छी संगति से मूर्ख भी विवेकशील बन जाता है।

    2. युवा पीढ़ी को संस्कार और नारी सम्मान आवश्यक है।

    3. संस्था गरीब छात्रों को डॉक्टर बनाने में मदद करती है।

    जागरण संवाददाता, गोविंदपुर (धनबाद)। Anand Peethadhishwar Acharya Mahamandaleshwar Swami Balkananand Giri: आनंद पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरि महाराज ने शनिवार को दिल्ली जाने के क्रम में गोविंदपुर में कहा कि संगति से मूर्ख व्यक्ति भी विवेकशील हो जाता है। बुरी संगति से सज्जन व्यक्ति भी दुर्जन बन जाता है। अतः हमें सज्जनों की संगति करनी चाहिए। इसका असर हमारे जीवन पर पड़ता है।

    गोस्वामी तुलसीदास ने भी कहा है सठ सुधरे सत्संगति। अच्छे लोगों की संगति से मूर्ख में भी विवेक आ जाता है। आज की युवा पीढ़ी को संस्कार देने की आवश्यकता है। समाज में आज रिश्ते-नाते लुप्त हो रहे हैं। अत: हमें संस्कारों को जागृत करना होगा। विकार युक्त जीवन को सनातन संस्कार युक्त करते हैं। नारी पूजनीय है और हमें नारी का सम्मान करना चाहिए। जीवन की चार अवस्थाएं हैं।

    ब्रह्मचर्य, गृहस्थ , वानप्रस्थ और सन्यास। ब्रह्मचर्य शिक्षा प्राप्त करने का आश्रम है। गृहस्थ आश्रम में धर्म की स्थापना होती है और इसमें धर्मपत्नी का भी योगदान होता है। महाराज ने कहा कि उनका लक्ष्य देशभर में 108 डाक्टर बनाना है और अब तक 45 डाक्टर बना चुके हैं।

    नीट परीक्षा में सफल गरीब और मेधावी विद्यार्थियों के मेडिकल कालेज में दाखिला में उनकी संस्था हरि धाम सनातन सेवा ट्रस्ट और हरिधाम सनातन साईं ट्रस्ट मदद करती है। देशभर के पांच मेडिकल कालेज उनकी संस्था से जुड़े हुए हैं और संस्था की सिफारिश पर मेडिकल कालेज प्रबंधन एमबीबीएस की आधी फीस माफ कर देता है।

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    आधी फीस उनकी संस्था देती है। इसका उद्देश्य गरीब मरीज को निश्शुल्क चिकित्सा प्रदान करना है। जिनकी आर्थिक सहायता की जाती है उनके साथ पहली शर्त यही रखी जाती है कि गरीब रोगियों का निश्शुल्क इलाज करना होगा।

    इसके अलावा उनकी संस्था प्रतिदिन 1000 गरीबों और भूखों को भोजन कराती है। यह अभियान पिछले कई वर्षों से चल रहा है और आगे भी चलता रहेगा। समाजसेवी शंभूनाथ अग्रवाल के नेतृत्व में शिष्यों ने उनका स्वागत किया । इसके बाद वह दिल्ली रवाना हो गए।