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    Jharkhand CM पशुधन योजना पर सवाल: बिना मवेशी दिए निकाले 60 हजार रुपये, जांच शुरू होते ही भैंस-बछड़ा लौटाया

    By Anoop Kumar Srivastava Edited By: Mritunjay Pathak
    Updated: Fri, 10 Apr 2026 05:18 PM (IST)

    Jharkhand CM Pashudhan Yojana Fraud: झारखंड में मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप है। दुमका के रानीश्वर में डेढ़ सा ...और पढ़ें

    बीडीओ की उपस्थिति में वेंंडर ने लाभुक को साैंपा भैंस। (फोटो जागरण)

    बीडीओ की उपस्थिति में वेंंडर ने लाभुक को साैंपा भैंस। (फोटो जागरण)

    HighLights

    1. मुख्यमंत्री पशुधन योजना में घोटाले का बड़ा खुलासा।

    2. लाभुक को डेढ़ साल बाद मिली भैंस और बछड़ा।

    3. बीडीओ की मौजूदगी में वेंडर ने मवेशी लौटाए।

    अनूप श्रीवास्तव, दुमका। Jharkhand CM Pashudhan Yojana Fraud: झारखंड में मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। यदि इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हो सकते हैं। इसका एक उदाहरण उपराजधानी दुमका के रानीश्वर प्रखंड में देखने को मिला है।

    पशुपालन विभाग ने अपने ऊपर लगे आरोपों से बचने के लिए करीब डेढ़ वर्ष बाद वेंडर पर दबाव बनाकर शुक्रवार को महिला लाभुक मति सोरेन को भैंस और उसका बछड़ा सौंप दिया। वेंडर के कहने पर पाटजोर के बिचौलिया गौतम घोष ने रानीश्वर के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) राजेश कुमार सिन्हा की मौजूदगी में लाभुक को मवेशी सौंपा।

    इससे यह स्पष्ट होता है कि वेंडर द्वारा गड़बड़ी की गई थी और अपने बचाव के लिए उसे भैंस लौटानी पड़ी। हालांकि, इस मामले की जांच यहीं थमने वाली नहीं है। यदि अन्य प्रखंडों में भी जांच की जाए तो ऐसे और मामले सामने आ सकते हैं।

    दरअसल, चार अप्रैल को पाटजोर पंचायत के सजनीपाड़ा गांव की लाभुक मति सोरेन ने बीडीओ को आवेदन देकर बताया कि अक्टूबर 2024 में उसे मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत पशुधन स्वीकृत हुआ था।

    पाटजोर गांव के गौतम घोष ने उसका आधार कार्ड लेकर आसना के सीएसपी में बैंक खाता खुलवाया और एक स्थान पर मवेशी के साथ उसकी तस्वीर खींचकर यह कहकर भेज दिया कि जल्द ही पशुधन उपलब्ध करा दिया जाएगा।

    इसके बाद वेंडर ने बिना पशुधन दिए ही खाते से 60 हजार रुपये की निकासी कर ली। बीडीओ द्वारा जांच शुरू किए जाने पर विभाग ने मामले को दबाने का प्रयास किया और वेंडर पर पशुधन वापस करने का दबाव बनाया।

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    इसी दबाव के चलते बिचौलिया ने बीडीओ की उपस्थिति में लाभुक को भैंस और उसका बछड़ा सौंप दिया। इस दौरान प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी, कनीय अभियंता और पंचायत सचिव भी मौजूद थे।

    सवालों के घेरे में विभाग की भूमिका

    अब सवाल यह उठता है कि जिस वेंडर को विभाग पूरी तरह से निर्दोष बता रहा था और महिला लाभुक को ही दोषी ठहरा रहा था, उसी के माध्यम से पशुधन क्यों लौटाया गया? यदि महिला ही दोषी थी, तो जांच में यह साबित होता।

    भैंस लौटाकर विभाग ने अप्रत्यक्ष रूप से गड़बड़ी की आशंका को बल दिया है। ऐसा प्रतीत होता है कि विभाग पूरे मामले को दबाने के लिए 60 हजार रुपये खर्च कर इसे शांत करना चाहता है।

    अब तक पासबुक नहीं मिली

    राशि निकासी के बावजूद महिला लाभुक को अब तक बैंक खाते की पासबुक नहीं मिली है। लाभुक के अनुसार, खाता खुलने के कुछ दिन बाद ही गौतम घोष ने चेक पर हस्ताक्षर करवाकर पासबुक अपने पास रख ली थी। बिचौलिया ने जल्द पासबुक लौटाने का आश्वासन दिया है।

    बीडीओ राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि वेंडर के कहने पर बिचौलिया ने लाभुक को भैंस और उसका बछड़ा वापस कर दिया है। मामले की जांच जारी है और प्रखंड में इस तरह के अन्य मामले भी सामने आ सकते हैं।