दुमका का शुंभेश्वरनाथ मंदिर को पर्यटन केंद्र बनाने की मांग: एक साथ 3 शिवालयों के दर्शन, मिलेगा रोजगार
दुमका के सरैयाहाट स्थित प्राचीन शुंभेश्वरनाथ मंदिर को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग की जा रही है, जिससे श्रद्धालुओं को सुविधाएँ मिलें औ ...और पढ़ें
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संवाद सहयोगी, सरैयाहाट (दुमका)। प्राकृतिक सुंदर वादियों से घिरा सरैयाहाट प्रखंड का प्राचीन शुंभेश्वरनाथ मंदिर धार्मिक आस्था के साथ पर्यटन की अपार संभावनाएं समेटे हुए है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इस स्थल का सुनियोजित विकास पर्यटन विभाग द्वारा कराया जाए तो न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी बल्कि क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
वर्तमान में मंदिर तक जाने की सड़क की अच्छी सुविधा उपलब्ध है लेकिन श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए होटल, धर्मशाला और अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। सावन माह में यहां जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में कांवरिया और डाक बम पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है लेकिन रात्रि विश्राम या भोजन जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
यहां के लोगों का कहना है कि यदि यहां होटल, धर्मशाला, शौचालय, पेयजल और पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएं तो श्रद्धालुओं की संख्या में और बढ़ोतरी होगी। मंदिर परिसर के समीप स्थित जलाशय पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। यहां नौका बिहार की व्यवस्था विकसित हो सकती है।

वर्ष 2004 में पर्यटन विभाग की ओर से मंदिर परिसर की चारदीवारी और सौंदर्यीकरण का कार्य कराया गया था। इसके बाद सांसद डॉ. निशिकांत दुबे के सांसद निधि से भी कुछ विकास कार्य हुए हैं। लेकिन लंबे समय से कोई व्यापक योजना नहीं बनने के कारण यह स्थल अपेक्षित विकास से वंचित है।
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शुम्भेश्वरनाथ मंदिर से जुड़ी है पौराणिक मान्यताएं
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सतयुग में शुंभ और निशुंभ नामक दो दानव भाइयों ने यहां अद्वितीय लंबवत जुड़े हुए शिवलिंग की स्थापना की थी। ऐसी मान्यता है कि इस प्रकार का शिवलिंग अन्य शिवालयों में दुर्लभ है। यही कारण है कि झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मंदिर तक पहुंचने का मार्ग भी सुविधाजनक है।

हंसडीहा-देवघर मुख्य मार्ग पर कोठिया से लगभग तीन किलोमीटर दूर धौनी मोड़ और वहां से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर मंदिर स्थित है। इसी मार्ग से पांडेश्वरनाथ और बासुकीनाथ मंदिर भी जाया जा सकता है। श्रद्धालु एक ही यात्रा में शुंभेश्वरनाथ, पांडेश्वरनाथ और बासुकीनाथ तीनों शिवालयों के दर्शन कर सकते हैं।
शुम्भेश्वरनाथ मंदिर की धार्मिक मान्यताएं अत्यंत प्राचीन है। सावन में हजारों श्रद्धालु यहां जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। यदि सरकार यहां मूलभूत सुविधाओं का विकास कराए तो यह स्थल राज्य के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है।
रविरंजन पाठक, मंदिर के पुजारी
मंदिर के विकास से आसपास के युवाओं को होटल, दुकान, वाहन और अन्य व्यवसायों के माध्यम से रोजगार मिलेगा। इससे पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। सरकार व प्रशासन को गंभीरता से प्रयास करने की जरूरत है।
रजनीश पाठक, ग्रामीण धौनी
मंदिर का प्राकृतिक वातावरण बेहद मनमोहक है, लेकिन ठहरने और शौचालय जैसी सुविधाओं के अभाव में महिलाओं और परिवार के साथ आने वाले श्रद्धालुओं को कठिनाई होती है। प्रशासन को अविलंब इस दिशा में पहल करने की जरूरत है।
दुष्यंत पाठक, ग्रामीण धौनी
शुंभेश्वरनाथ, पांडेश्वरनाथ और बासुकीनाथ को जोड़ कर धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित किया जाए तो यह क्षेत्र पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है। सरकार को इस दिशा में शीघ्र पहल करनी चाहिए।
गौरव पाठक, सामाजिक कार्यकर्ता धौनी