मडुआ की खेती पर झारखंड सरकार देगी ₹3000 प्रोत्साहन राशि, 97% सब्सिडी पर मिलेगा सोलर पंप सेट
मसलिया प्रखंड में किसान गोष्ठी आयोजित हुई, जिसमें किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और कम पानी वाली फसलों की खेती के बारे में बताया गया। ...और पढ़ें

मडुआ की खेती
HighLights
मसलिया में किसान गोष्ठी, आधुनिक कृषि तकनीकों पर जानकारी दी गई।
मडुआ की खेती पर प्रति एकड़ ₹3000 प्रोत्साहन राशि मिलेगी।
पीएम कुसुम योजना से 97% सब्सिडी पर सोलर पंप सेट।
संवाद सहयोगी, मसलिया (दुमका)। खरीफ मौसम की तैयारी को लेकर मसलिया प्रखंड की हाड़ोरायडीह पंचायत के समीप मंगलवार को आत्मा समिति की ओर से किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से अवगत कराते हुए कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आय के लिए जागरूक किया गया।
बीटीएम श्यामसुंदर सिंह ने किसानों को मिलेट, दलहन, तिलहन की उन्नत खेती, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, गुणवत्तायुक्त बीज के महत्व, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन व समेकित कीट प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में कम पानी वाली फसलों की खेती किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है। उन्होंने मिलेट मिशन योजना की जानकारी देते हुए बताया कि मडुआ (रागी) की खेती कम लागत और कम पानी में सफलतापूर्वक की जा सकती है।
प्रति एकड़ तीन हजार की प्रोत्साहन राशि
मडुआ में कैल्शियम, आयरन, फाइबर, प्रोटीन एवं अन्य पौष्टिक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो इसे पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण फसल बनाते हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत मडुआ की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ तीन हजार की प्रोत्साहन राशि सरकार देती है। किसानों को पीएम कुसुम योजना की भी जानकारी दी गई।
बताया कि इस योजना के तहत किसानों को लगभग 97 प्रतिशत अनुदान पर मात्र 5,000 रुपये के अंशदान में सोलर पंप सेट उपलब्ध कराया जाता है। जिससे सिंचाई की लागत में कमी आएगी और खेती अधिक लाभकारी बनेगी।
बीटीएम ने रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों से जैविक खाद, जैव उर्वरक एवं रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि इससे मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है और पोषणयुक्त एवं गुणवत्तापूर्ण फसल का उत्पादन संभव होता है।