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    स्वाद और सेहत का खजाना है देशी 'खेख्सा', 200 रुपये किलो होने के बावजूद बाजार में भारी डिमांड

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 03:31 PM (IST)

    बारिश के मौसम में दुमका में प्राकृतिक रूप से उगने वाली खेख्सा (ककोड़ा) 200-250 रुपये प्रति किलो बिक रही है। यह स्वादिष्ट और पौष्टिक सब्जी वजन नियंत्रण ...और पढ़ें

    स्वाद और सेहत का खजाना है देशी 'खेख्सा', 200 रुपये किलो होने के बावजूद बाजार में भारी डिमांड

    स्वाद और सेहत का खजाना है देशी 'खेख्सा', 200 रुपये किलो होने के बावजूद बाजार में भारी डिमांड

    HighLights

    1. खेख्सा बारिश में 200-250 रुपये प्रति किलो बिक रही।

    2. यह स्वादिष्ट और पौष्टिक, कई बीमारियों में फायदेमंद।

    3. वजन नियंत्रण, पाचन और मधुमेह में सहायक सब्जी।

    संवाद सहयोगी, सरैयाहाट (दुमका)। बारिश के मौसम में जंगल और खेतों की मेढ़ों पर प्राकृतिक रूप से उगने वाली खेख्सा या कोंकरी की मुरीदों की कोई कमी नहीं है। स्वाद और पौष्टिकता से भरपूर इस मौसमी सब्जी की कीमत बाजार में 200 रुपये प्रतिकिलो के भाव में बिक रहा है।

    दुमका समेत सरैयाहाट, हंसडीहा समेत आसपास के साप्ताहिक बाजारों खेख्सा उपलब्ध है। वैसे तो खेख्सा की उपलब्धता बाजार में अब सालों भर रहती है, लेकिन बारिश के दिनों में देशी खेख्सा की जबरदस्त मांग रहती है।

    कई नाम से जाना जाता है खेख्सा

    खेख्सा को कई नाम से जाना जाता है। इसे ककोड़ा, कोंकरी, कंटोला, कांकोड़ा, मीठा करेला या स्पाइनी गॉर्ड के नाम से भी पुकारा जाता है। प्राकृतिक रूप से उगने वाली इस सब्जी की बाहरी सतह पर छोटे-छोटे कांटे होते हैं, जबकि अंदर का गूदा मुलायम और स्वादिष्ट होता है।

    इसकी सब्जी, भुजिया, भरवा और अचार भी बनाया जाता है। खेख्सा मुख्य रूप से जुलाई से सितंबर के मिलता है। यह अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों, जंगलों, झाड़ियों, खेतों की मेढ़ों तथा हल्की दोमट मिट्टी पर विकसित होता है। कई किसान अब इसकी व्यावसायिक खेती भी करने लगे हैं।

    खेख्सा में विटामिन-सी, विटामिन-ए, फाइबर, कैल्शियम, आयरन, फास्फोरस, पोटैशियम तथा एंटी आक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें कैलोरी कम होने के कारण यह वजन नियंत्रित रखने में भी सहायक है। नियमित सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। पाचन तंत्र बेहतर रहता है तथा शरीर को आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। मधुमेह के मरीजों के लिए भी फायदेमंद है। - डॉ. प्रभारानी प्रसाद, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरैयाहाट

    खेख्सा के मुरीद हैं। इसका स्वाद अलग होता है। बरसात में इसके आने का इंतजार करते हैं। इसे खाने से पौष्टिकता, स्वाद के साथ कई बीमारियां भी ठीक होती है। खासकर कब्ज दूर करने और मधुमेह कंट्रोल करने में सहायक है। - मनीष कुमार सिंह, ग्रामीण

    ग्रामीण मनोज कुमार साह ने कहा कि पहले जंगलों में खेख्सा खूब मिलता था लेकिन अब इसकी मात्रा कम हो गई है। महंगा होने के बावजूद लोग इसे खरीदते हैं, क्योंकि यह स्वादिष्ट होने के साथ पौष्टिक भी है।इसकी मांग ग्रामीण ही नहीं शहरी क्षेत्रों में भी है।

    सब्जी विक्रेता राजेश मंडल ने कहा कि रोजाना सीमित मात्रा में ही देशी खेख्सा बाजार में उतरता है। इसलिए इसकी खपत भी तुरंत हो जाती है। बाजार में इसकी कीमत 200 से 250 रुपए प्रति किलो तक है। अब सालों भर खेख्सा बाजार में उपलब्ध होता है, लेकिन देशी की मांग ज्यादा रहती है।

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