अब्दुल शकूर हत्याकांड: गढ़वा में 15 साल बाद आया फैसला, आरोपी को उम्रकैद की सजा; 5 हजार जुर्माना
गढ़वा में 2011 के अब्दुल शकूर हत्याकांड में आरोपी शाहिद अहमद को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर
HighLights
शाहिद अहमद को अब्दुल शकूर हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा।
गढ़वा अदालत ने 2011 के हत्या मामले में दोषी करार दिया।
पुरानी रंजिश के कारण हुई थी यह खूनी वारदात।
संवाद सहयोगी, गढ़वा। गढ़वा थाना क्षेत्र के महुलिया गांव में वर्ष 2011 में पुरानी रंजिश के चलते अब्दुल शकूर अंसारी की निर्मम हत्या के मामले में गढ़वा के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय की अदालत ने आरोपी शाहिद अहमद को दोषी करार दिया और शुक्रवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक उमेश दीक्षित ने मजबूती से पक्ष रखा और सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों व गवाहों को प्रस्तुत किया। अदालत ने पलामू जिले के बैरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत खनवा गांव निवासी दोषी शाहिद अहमद पर पांच हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। अर्थदंड चुकता न करने पर उसे तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
यह रोंगटे खड़े कर देने वाली खूनी वारदात 17 मार्च 2011 की रात की है। गढ़वा थाना क्षेत्र के महुलिया निवासी मैना बीबी ने तत्कालीन पुलिस पदाधिकारियों के समक्ष दर्ज बयान में पूरी घटना सुनाई थी।
सूचिका के मुताबिक, उस रात परिवार के सभी सदस्य खाना खाकर अपने-अपने कमरों में सो चुके थे, जबकि उनके पति अब्दुल शकूर अंसारी बाहर बरामदे में सो रहे थे। देर रात अचानक चीख-पुकार सुनकर जब मैना बीबी की नींद खुली और वह बाहर आईं, तो देखा कि गांव के अलीजान अंसारी, रिजवान अंसारी और शाहिद अहमद समेत कई लोग उनके पति को जमीन पर पटक-पटक कर बेरहमी से पीट रहे थे।
दबंग आरोपी इतने पर ही नहीं थमे, वे लहूलुहान अब्दुल शकूर को जबरन घसीटते हुए अलीजान के घर ले गए और वहां पत्थरों से कुचलकर उन्हें गंभीर रूप से जख्मी कर दिया। बीच-बचाव करने पहुंची सूचिका और उनकी बहू को भी आरोपियों ने जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया।
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शोरगुल सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और गंभीर हालत में अब्दुल शकूर को अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इस संबंध में गढ़वा थाना में कांड संख्या 47/2011 दर्ज कर पुलिस ने तफ्तीश शुरू की थी।
पुलिस अनुसंधान में हत्या की असली वजह पुरानी रंजिश निकलकर सामने आई। दरअसल, अब्दुल शकूर ने अलीजान के खिलाफ वर्ष 2007 में गढ़वा थाना में कांड संख्या 269/2007 दर्ज कराया था, जिसमें अलीजान को जेल जाना पड़ा था।
17 मार्च 2011 को जेल से छूटते ही अलीजान ने अब्दुल शकूर को अंजाम भुगतने की धमकी दी थी और उसी रात इस खूनी वारदात को अंजाम दे दिया। पुलिस ने जांच पूरी कर सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। मामले के अन्य आरोपियों के खिलाफ न्यायालय पहले ही फैसला सुना चुका था, जबकि शाहिद अहमद के खिलाफ अलग वाद चलाकर सुनवाई की जा रही थी।
लोक अभियोजक उमेश दीक्षित द्वारा पेश किए गए ठोस साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने शाहिद को भारतीय दंड विधान की धारा 148 में एक वर्ष, धारा 323 में छह माह, धारा 325 में तीन वर्ष की कैद व एक हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।