नियुक्ति के 4 महीने बाद ही सेवानिवृत्ति: गढ़वा में शिक्षक की 20 साल की मेहनत बेकार, नहीं मिला पैसा
20 वर्षों तक पारा शिक्षक के रूप में सेवा देने के बाद, उन्हें सहायक आचार्य के रूप में केवल चार महीने की नौकरी मिली और वे बिना वेतन के सेवानिवृत्त हो गए ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संकेत कुमार श्रीवास्तव, खरौंधी(गढ़वा)। राज्य में लगभग एक दशक बाद प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में शिक्षकों की बहुप्रतीक्षित नियुक्ति हुई है। लेकिन इस प्रक्रिया में हुई देरी ने कुछ शिक्षकों को निराश किया है। उन्हें वर्षों के संघर्ष, परीक्षा और लंबे इंतजार के बाद नौकरी तो मिली। लेकिन कुछ ही महीनों में सेवानिवृत्ति हो गए।
ऐसा ही एक मामला खरौंधी प्रखंड से सामने आया है, जहां राजेश कुमार श्रीवास्तव महज चार महीने की नौकरी के बाद मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गए। सेवानिवृत से पूर्व उन्हें एक माह का वेतन भी नहीं मिला।
राजेश कुमार श्रीवास्तव ने दो दिसंबर 2025 को उत्क्रमित मध्य विद्यालय कोशलीबार में सहायक आचार्य के रूप में योगदान दिया था। लेकिन प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण उनका वेतन भुगतान अब तक लंबित है।
उन्होंने 21 जुलाई 2005 से सर्व शिक्षा अभियान के तहत पारा शिक्षक के रूप में अपनी सेवा शुरू की और लगातार 20 वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दिया।
सेवा के दौरान उन्होंने 2011 में डीपीई प्रशिक्षण पूरा किया और 2016 में जेटेट परीक्षा भी उत्तीर्ण की, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया में देरी के कारण उन्हें समय पर स्थायी नौकरी नहीं मिल सकी। आखिरकार सहायक आचार्य में उन्हें 6 से 8 वर्ग के लिए नियुक्ति मिली। लेकिन नियुक्ति के महज चार महीने बाद ही वे सेवानिवृत्त हो गए।
समय पर नियुक्ति होती तो मिलती राहत
सेवानिवृत्त शिक्षक राजेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि अगर समय पर टेट और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हुई होती, तो वे कम से कम 15 वर्षों तक नियमित सेवा दे सकते थे। उन्होंने बताया पात्रता परीक्षा के बाद करीब 7 साल बाद नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हुई और फिर दो साल बाद जाकर पूरी हुई।

(सेवानिवृत शिक्षक राजेश कुमार श्रीवास्तव)
उन्होंने सरकार से मांग की है कि पारा शिक्षक के रूप में दी गई 20 वर्षों की सेवा को आधार मानते हुए उन्हें पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाएं। अब वे बिना किसी लाभ और वेतन के ही सेवानिवृत्त हो गए हैं, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।