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    लोहरदगा में शवदाह गृह बना कचरा डंपिंग यार्ड, 2 साल से बंद पड़ी डेढ़ करोड़ की परियोजना

    Updated: Wed, 01 Apr 2026 02:51 PM (IST)

    लोहरदगा में डेढ़ करोड़ की लागत से बना विद्युत शवदाह गृह तीन साल से बंद पड़ा है। 2024 में निर्माण पूरा होने के बावजूद यह चालू नहीं हुआ, जिससे लोगों को ...और पढ़ें

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    विक्रम चौहान, लोहरदगा। लोहरदगा शहर में लंबे समय से तैयार पड़ा विद्युत शवदाह गृह आज भी शुरू होने का इंतजार कर रहा है। शहरी क्षेत्र के कचहरी रोड में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस आधुनिक सुविधा का उपयोग अब तक नहीं हो पाया है, जिससे आम लोगों को अंतिम संस्कार के समय भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    इस योजना का निर्माण कार्य झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी के माध्यम से वर्ष 2021 में शुरू किया गया था। निर्माण कार्य को वर्ष 2024 में पूरा भी कर लिया गया, लेकिन इसके बावजूद इसे चालू करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। स्थिति यह है कि आज तक यह शवदाह गृह सिर्फ एक बंद ढांचा बनकर रह गया है।

    विद्युत शवदाह गृह का उद्देश्य पारंपरिक लकड़ी आधारित दाह संस्कार के विकल्प के रूप में एक सस्ती, पर्यावरण के अनुकूल और सुविधाजनक व्यवस्था प्रदान करना था। लेकिन इसके बंद रहने से लोगों को आज भी पुराने तरीकों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे समय, खर्च और पर्यावरण तीनों पर नकारात्मक असर पड़ता है। कई बार तो लावारिश शवों के अंतिम संस्कार में भी परेशानी आती है।

    वैकल्पिक कचरा डंपिंग यार्ड

    चिंताजनक बात यह है कि इस भवन का उपयोग कभी-कभी वैकल्पिक कचरा डंपिंग यार्ड के रूप में किया जा रहा है। कई बार यहां कबाड़ भी जमा कर दिया जाता है, जिससे इसकी स्थिति और बदतर होती जा रही है।

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    रखरखाव के अभाव में भवन की हालत जर्जर होने लगी है। हाल ही में यहां से कुछ उपकरणों की चोरी होने की भी सूचना मिली है, जो सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

    नगर परिषद इस महत्वपूर्ण परियोजना को लेकर गंभीर नहीं

    नगर परिषद इस महत्वपूर्ण परियोजना को लेकर गंभीर नहीं है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद इसका लाभ जनता को नहीं मिल रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इसे चालू नहीं किया गया, तो यह पूरी तरह बेकार हो जाएगा और सरकारी धन की बर्बादी साबित होगा। नगर परिषद और जिला प्रशासन की ओर से भी मामले में ध्यान नहीं दिए जाने से लोग सवाल कर रहे हैं।

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    वे जल्द ही इस योजना का निरीक्षण करेंगे। यह पता लगाया जाएगा कि आखिर किन कारणों से यह शवदाह गृह शुरू नहीं हो सका है। साथ ही इसमें यदि कोई तकनीकी या प्रशासनिक कमी है तो उसे दूर कर जल्द से जल्द इसे चालू करने की कोशिश की जाएगी।

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    अनिल उरांव, अध्यक्ष, नगर परिषद, लोहरदगा