गढ़वा के कस्तूरबा स्कूल में 100 छात्राओं के बीमार पड़ने के बाद पसरा सन्नाटा, शिक्षिका और रसोइया पर एक्शन शुरू
गढ़वा के खरौंधी कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में लगभग 100 छात्राओं के बीमार पड़ने के बाद सभी घर लौट गईं, जिससे विद्यालय वीरान हो गया है। ...और पढ़ें

100 छात्राओं के बीमार पड़ने के बाद पसरा सन्नाटा
HighLights
लगभग 100 छात्राएं बीमार पड़ने से विद्यालय वीरान।
लापरवाही के लिए वार्डन, शिक्षिका, रसोइया पर कार्रवाई शुरू।
शिक्षा विभाग के सामने छात्राओं का विश्वास जीतने की चुनौती।
संवाद सूत्र, खरौंधी (गढ़वा)। खरौंधी कस्तूरबा आवासीय विद्यालय लगभग 100 छात्राओं के सामूहिक रूप से बीमार पड़ने की घटना के बाद विरान हो गया है। एहतियात के तौर पर सभी छात्राओं को अभिभावक अपने-अपने घर ले गए।
शनिवार तक विद्यालय में रह रही सभी छात्राएं वापस लौट चुकी हैं। रविवार को विद्यालय परिसर पूरी तरह सुनसान वीरान नजर आया। विद्यालय में जहां पहले तक छात्राओं की प्रार्थना, कक्षाएं और खेलकूद सहित अन्य गतिविधियां आयोजित होने से चहल पहल रहती थी। वहीं अब परिसर में केवल सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात हैं।
जिम्मेदार कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू
कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में लगातार बीमार होने की घटना को संज्ञान में लेते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की है। शनिवार को उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने विद्यालय और अस्पताल पहुंचकर छात्राओं के स्वास्थ्य की जानकारी ली।
विद्यालय की प्रारंभिक जांच में लापरवाही पाए जाने पर वार्डन, पूर्णकालिक शिक्षिका, लेखापाल, रसोइया सहित अन्य जिम्मेदार कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिससे विद्यालय सुनसान हो गया है।
शिक्षा विभाग को चुनौती
विद्यालय में लगभग 300 छात्राएं नामांकित हैं। छात्राओं के लगातार बीमार होने की घटना के बाद सभी छात्रा घर लौट गई है। जिससे उनकी नियमित पढ़ाई फिलहाल प्रभावित हो गई है। अभिभावकों के मन में भी सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर चिंता बनी हुई है।
ऐसे में शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्राओं और अभिभावकों का विश्वास फिर से जीतकर उन्हें विद्यालय वापस लाना और शैक्षणिक गतिविधियों को सामान्य रूप से शुरू कराना है।
अभिभावकों ने कहा दोषियों पर कार्रवाई आवश्यक है। लेकिन इसके साथ-साथ विद्यालय में सुरक्षित वातावरण, स्वच्छ पेयजल, गुणवत्तापूर्ण भोजन और बेहतर निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। ताकि छात्राओं की शिक्षा प्रभावित न हो और विद्यालय में जल्द फिर से पहले जैसी रौनक लौट सके।