Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    आयुष हत्याकांड: खुलासा न होने से बढ़ा आक्रोश, कानून-व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल

    Updated: Wed, 18 Feb 2026 11:59 PM (GMT+05:30)

    गिरिडीह के धनवार में 12 वर्षीय आयुष कुमार हत्याकांड का खुलासा न होने से लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। 10 फरवरी को लापता आयुष का शव 14 फरवरी को एक कुएं ...और पढ़ें

    News Article Hero Image
    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    संवाद सहयोगी, धनवार (गिरिडीह)। धनवार थाना क्षेत्र के मायाराम टोला निवासी आयुष कुमार हत्याकांड के खुलासा में देर होने के साथ लोगों के अंदर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। एवं भय अपना जगह बनाना शुरू कर दिया है। मायाराम टोला निवासी 12 वर्षीय आयुष कुमार 10 फरवरी की शाम अपने घर के पीछे खेलते समय लापता हो गया था। स्वजन के खोजबीन के बाद भी नहीं मिला।

    फिर धनवार थाना में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। मामले की जांच चल ही रही थी कि 14 फरवरी को धनवार नगर पंचायत क्षेत्र में नौलखा डैम जाने वाले मार्ग से करीब चार सौ मीटर उत्तर स्थित एक सुनसान पुराने कुएं से उसका शव बरामद हुआ था।

    शव मिलने के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया था और ग्रामीणों ने धनवार-खोरीमहुआ मुख्य मार्ग जाम कर दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की थी। खोरीमहुआ एसडीएम अनिमेष रंजन व अन्य पदाधिकारियों के आश्वासन के बाद जाम हटाया जा सका था।

    घटना के बाद एसडीपीओ राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में विशेष जांच दल का गठन किया गया। दल में प्रशिक्षु डीएसपी, जमुआ इंस्पेक्टर सहित चार थाना प्रभारी शामिल हैं। तकनीकी सेल, काल डिटेल विश्लेषण, सीसीटीवी फुटेज संग्रह, डाग स्क्वायड और एफएसएल की सहायता से जांच करने की बात कही गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए गिरिडीह भेजा गया।

    खबरें और भी

    हालांकि 18 फरवरी तक भी घटना को ले कोई आधिकारिक खुलासा नहीं हो सका है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने से लोगों में बेचैनी बनी हुई है। परिजन इसे हत्या करार देते हुए दोषी की शीघ्र गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग पर अड़े हैं। इधर आयुष कांड ने क्षेत्र की पूर्व लंबित आपराधिक घटनाओं को भी चर्चा में ला दिया है।

    वर्ष 2023 में हुई चर्चित चाची-भतीजी हत्याकांड का अब तक खुलासा नहीं हो पाया है। उस मामले में भी एसआइटी गठन की मांग लगातार उठती रही है। इसके अलावा प्रेम कुमार यादव के लापता होने को एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन पुलिस अब तक उनका कोई सुराग नहीं लगा पाई है।

    लगातार गंभीर मामलों के लंबित रहने से क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि संवेदनशील मामलों में त्वरित, पारदर्शी और परिणाममुखी जांच आवश्यक है, ताकि आमजन का भरोसा कायम रह सके।