गिरिडीह में महुआ के लिए जंगल जल रहे, वन संपदा और जीव-जंतु संकट में
Giridih Forest Fires for Mahua: गिरिडीह के डुमरी में महुआ चुनने के लिए जंगलों में आग लगाने की घटनाएं बढ़ गई हैं। इससे वन संपदा, जीव-जंतु और पर्यावरण क ...और पढ़ें

महुआ चुनने के लिए जंगलों में लगाई जा रही आग।
HighLights
महुआ चुनने हेतु जंगलों में आग लगाने की घटनाएं बढ़ीं।
वन संपदा, जीव-जंतु और पर्यावरण को भारी नुकसान।
वन विभाग की कार्रवाई अप्रभावी, कानूनी चेतावनी जारी।
संवाद सहयोगी, जागरण, डुमरी (गिरिडीह)। Giridih Forest Fires for Mahua: वैशाख माह की शुरुआत के साथ ही महुआ चुनने के लिए जंगलों में आग लगाने की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। इससे वन क्षेत्र को भारी नुकसान हो रहा है, वहीं आग में झुलसकर जीव-जंतु भी मर रहे हैं। बावजूद इसके, वन विभाग की ओर से प्रभावी रोकथाम नहीं दिख रही है।
निमियाघाट थाना क्षेत्र के पारसनाथ पहाड़ी की तलहटी में इन दिनों कुछ लोग जानबूझकर जंगल में आग लगा रहे हैं, ताकि गिरे हुए महुआ फूल आसानी से इकट्ठा किए जा सकें। इस प्रक्रिया में कीमती व औषधीय पेड़-पौधे जलकर नष्ट हो रहे हैं। साथ ही, पर्यावरण पर भी इसका गंभीर असर पड़ रहा है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन की समस्या और बढ़ रही है।
झामुमो प्रखंड अध्यक्ष राजकुमार महतो ने कहा कि वन विभाग द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान का ग्रामीणों पर अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ रहा है। उन्होंने महुआ सीजन में जंगलों में आग लगाने पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की। उनका कहना है कि आग से छोटे पौधे नष्ट हो जाते हैं और हरे-भरे जंगल तेजी से खत्म हो रहे हैं।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे जंगलों में आग न लगाएं और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा करें। वहीं, फोरेस्टर मनीष कुमार ने चेतावनी दी कि महुआ पेड़ों के नीचे आग लगाते पकड़े जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।