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    एक करोड़ के इनामी माओवादी अनल दा की मौत के बाद गांव में सन्नाटा, डर और पिछड़ेपन की गवाही देता दीवानडीह झरहा

    By Pramod Chaudhary Edited By: Mritunjay Pathak
    Updated: Thu, 22 Jan 2026 10:43 PM (IST)

    Maoist Anil Da Killed: झारखंड के सारंडा जंगल में एक करोड़ के इनामी माओवादी अनल दा की मुठभेड़ में मौत के बाद उसके पैतृक गांव दीवानडीह झरहा में सन्नाटा ...और पढ़ें

    माओवादी अनल दा (फाइल फोटो) और उसका गांव दीवानडीह झरहा (फोटो जागरण)

    माओवादी अनल दा (फाइल फोटो) और उसका गांव दीवानडीह झरहा (फोटो जागरण)

    HighLights

    1. एक करोड़ के इनामी माओवादी अनल दा मुठभेड़ में मारा गया।

    2. अनल दा के पैतृक गांव दीवानडीह झरहा में सन्नाटा पसरा।

    3. गांव में डर, खामोशी और पिछड़ेपन की तस्वीर दिखी।

    जागरण संवाददाता, पीरटांड (गिरिडीह)। Jharkhand News: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में गुरुवार को सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी अनल दा उर्फ पतिराम मांझी के मारे जाने की खबर जैसे ही सामने आई, गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र स्थित उसके पैतृक गांव दीवानडीह झरहा में सन्नाटा पसर गया। उग्रवाद से लंबे समय से प्रभावित इस गांव में डर, खामोशी और पिछड़ेपन की तस्वीर साफ नजर आई।

    खामोशी में छिपा डर, महिलाएं दिखीं पर बोलने को कोई तैयार नहीं

    गुरुवार को अनल दा के गांव की गलियां सुनसान थीं। उसके गांव दीवानडीह झरहा में अजीब खामोशी छा गई। मुख्य रास्ते से सटे खपरैल के मकानों के दरवाजे बंद मिले। कहीं कोई पुरुष नजर नहीं आया। गलियों और देहरी पर इक्का-दुक्का महिलाएं जरूर दिखीं, लेकिन कोई भी अनल दा या मुठभेड़ की घटना पर बोलने को तैयार नहीं था। पूछने पर महिलाएं नजरें चुराते हुए चुप्पी साध लेती थीं। गांव के लोग न तो उसके घर की पहचान कराने को राजी हुए और न ही किसी तरह की जानकारी देने को।

    खपरैल का मकान, खुला दरवाजा और खाली घर

    अनल दा का घर मुख्य सड़क से सटा खपरैल का मकान है, जिसमें ताला नहीं लगा था, लेकिन घर पूरी तरह खाली मिला। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि उसके भाई और अन्य स्वजन मजदूरी के लिए बाहर गए हुए हैं। गांव के लोगों का कहना है कि यहां रोजगार के साधन न के बराबर हैं, जिस कारण अधिकांश पुरुष बाहर काम करने चले जाते हैं।

    करोड़ का इनामी, कई नाम और दर्जनों मुकदमे

    पुलिस के अनुसार अनल दा का असली नाम पतिराम मांझी था। वह दीवानडीह झरहा निवासी लेंगरा मांझी का बेटा था। अनल दा कई नामों से जाना जाता था और झारखंड व सीमावर्ती राज्यों में माओवादी संगठन का बड़ा चेहरा बन चुका था। गिरिडीह जिले के पीरटांड़, खुखरा, मधुबन, निमियाघाट समेत कई थानों में उसके खिलाफ दर्जनों संगीन मामले दर्ज थे।

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    अनल दा की कहानी सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन की देन 

    जानकारों का कहना है कि दीवानडीह झरहा जैसे गांवों में विकास की कमी, शिक्षा और रोजगार का अभाव ही उग्रवाद की जमीन तैयार करता है। सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण यहां के युवाओं का भटकना आसान हो जाता है। अनल दा की कहानी भी इसी सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन की देन मानी जा रही है।

    हालांकि सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से क्षेत्र में बड़े नक्सलियों का खात्मा हो रहा है, लेकिन दीवानडीह झरहा का सन्नाटा यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या केवल बंदूक से समस्या का समाधान संभव है, या फिर विकास और भरोसे की भी उतनी ही जरूरत है।

    क्या उग्रवाद की जड़ में है गांवों का पिछड़ापन?

    दीवानडीह झरहा जैसे गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे हैं। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की कमी यहां साफ नजर आती है। जानकार मानते हैं कि यही सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन उग्रवाद की जमीन तैयार करता है। अनल दा की मौत के बाद गांव का सन्नाटा इस बात की गवाही देता है कि केवल सुरक्षा कार्रवाई ही नहीं, बल्कि विकास और भरोसे की भी उतनी ही जरूरत है।