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    Purushottam Maas: 15 जून तक शुभ कार्यों पर ब्रेक, मलमास के दौरान क्या करें, क्या नहीं?

    Updated: Mon, 18 May 2026 01:54 AM (IST)

    पुरुषोत्तम मास (मलमास) 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा, इस दौरान वैवाहिक और अन्य शुभ कार्य वर्जित रहेंगे। यह मास भगवान विष्णु की आराधना और धार्मिक अनुष् ...और पढ़ें

    मलमास के दौरान क्या करें?

    मलमास के दौरान क्या करें?

    HighLights

    1. पुरुषोत्तम मास 17 मई से 15 जून तक, शुभ कार्य स्थगित।

    2. भगवान विष्णु को समर्पित, धार्मिक महत्व और संतुलन का समय।

    3. नाम जप, दान, पवित्र स्नान करें; नए कार्य से बचें।

    संवाद सहयोगी, हीरोडीह (गिरिडीह)। पुरुषोत्तम मास मलमास का आगाज हो चुका है। इस दौरान वैवाहिक कार्य व अन्य धार्मिक उत्सव बंद रहेंगे। मलमास 17 मई से शुरू हो गया है और आगामी 15 जून तक रहेगा।

    पुरुषोत्तम मास को मलमास अथवा अधिक मास भी कहा जाता है। हिंदू पंचांग का एक महत्वपूर्ण समय है। यह वह अतिरिक्त महीना है, जो हर तीसरे वर्ष चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए जुड़ता है।

    पुरुषोत्तम मास का है बेहद धार्मिक महत्व

    धार्मिक दृष्टिकोण से यह समय भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) की आराधना के लिए समर्पित है। मलमास होने का मुख्य कारण सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच के समय का अंतर है। भारतीय पंचांग इन दोनों गणनाओं के संतुलन पर आधारित है।

    ज्ञात हो कि सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच हर साल लगभग 11 दिन का अंतर आ जाता है। समय का संतुलन गणितीय कारण यदि इस 11 दिन के अंतर को ठीक न किया जाए, तो कुछ ही सालों में हमारे त्योहार और ऋतुओं का तालमेल पूरी तरह बिगड़ जाएगा।

    इस समय के अंतर को पाटने के लिए, हर तीसरे साल चंद्र कैलेंडर में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है। इसी अतिरिक्त महीने को पुरुषोत्तम मास, मलमास या अधिक मास कहते हैं।

    हिंदू पंचांग में जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है, तो उसे संक्रांत कहा जाता है। जिस चंद्रमा के महीने में सूर्य की कोई संक्रांति नहीं होती (यानी सूर्य राशि नहीं बदलता), उसे ही अधिक मास घोषित किया जाता है। इस व्यवस्था के कारण ही हमारे त्योहार जैसे दीपावली, दशहरा, मकर संक्रांति हमेशा अपनी निश्चित ऋतुओं में ही आते हैं।

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    मलमास के दौरान पालन किए जाने वाले मुख्य नियम

    मलमास में प्रतिदिन नाम जप और मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या पुरुषोत्तम सहस्त्रनाम का पाठ अत्यंत फलदायक माना जाता है। इस महीने में दीपदान, वस्त्र दान और अन्न दान का विशेष महत्व है। विशेष रूप से मिठाई, मालपुए का दान करना शुभ माना जाता है।

    इस समय भागवत पुराण या रामायण का पाठ करना या सुनना बहुत उत्तम माना गया है। इस मास में संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें, अन्यथा घर में ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी पुण्यकारी है।

    इस दौरान सात्विक जीवन मन, वचन और कर्म से शुद्धता बनाए रखें और सात्विक भोजन ग्रहण करें। इस मास में नई गाड़ी, मकान या जमीन खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है। किसी भी नए व्यापार या बड़े निवेश की शुरुआत इस अवधि में करने से बचना चाहिए।

    इसलिए महत्ता और अधिक

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर महीने के लिए एक स्वामी देवता निर्धारित हैं, लेकिन इस अतिरिक्त महीने का कोई स्वामी नहीं था, इसलिए इसे मलमास (अशुद्ध मास) कहा गया।

    तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम पुरुषोत्तम दिया और इसे अपना प्रिय महीना बनाया, ताकि इस समय में की गई आध्यात्मिक उन्नति का फल अनंत हो सके। इसीलिए इस महीने में की गई भक्ति का फल अन्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक माना जाता है।

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