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    झारखंड में माओवाद के उदय से अस्त तक का साक्षी है मिसिर बेसरा, 55 जवानों की हत्या से लखीसराय जेल ब्रेक तक जुड़ा नाम

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 02:49 PM (IST)

    Maoist Misir Besra: झारखंड के गिरिडीह-धनबाद सीमा पर एक करोड़ का इनामी माओवादी मिसिर बेसरा गिरफ्तार हुआ है। वह चार दशकों तक बिहार, बंगाल, ओडिशा में आतं ...और पढ़ें

    भाकपा माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा। (फाइल फोटो)

    भाकपा माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा। (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. एक करोड़ का इनामी माओवादी मिसिर बेसरा गिरफ्तार।

    2. धनबाद और गिरिडीह की सीमा पर हुई गिरफ्तारी।

    3. पीके राय कालेज में एमए की पढ़ाई के दाैरान ही माओवाद की राह पर चल पड़ा था।

    प्रमोद चौधरी, गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह व धनबाद की सीमा पर पुलिस की गिरफ्त में आए एक करोड़ का इनामी माओवादी राज्य में माओवाद यानी लालखंड के उदय से अस्त तक का साक्षी रहा है। वह धनबाद के पीके राय कॉलेज में एमए की पढ़ाई के दाैरान ही माओवाद की आतंकी राह पर पांव रख चुका था।

    मिसिर बेसरा करीब चार दशक तक बिहार, बंगाल, ओडिशा समेत कई राज्यों में आतंक का पर्याय बना रहा। अंततः मिसिर केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर चल रहे माओवाद विरोधी अभियान का शिकार अपने गढ़ में ही बन गया।

    गिरिडीह के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के मदनडीह निवासी मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ निर्मल भाकपा माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य है। उस पर सरकार ने एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। उस पर हत्या, आईईडी ब्लास्ट, पुलिस पर हमला और आर्म्स एक्ट के डेढ़ सौ से ज्यादा मामले दर्ज हैं।

    सारंडा, कोल्हान, पारसनाथ ओडिशा-बंगाल उसका मुख्य कार्य क्षेत्र था। 2003-04 में पश्चिम सिंहभूम के बिटकिलसोय और बलिबा में आईईडी ब्लास्ट की साजिश उसी ने रची थी, जिसमें 55 सुरक्षाकर्मी बलिदान हुए थे। 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट में दिनदहाड़े हमला कर नक्सलियो को छुड़ा लिया था।

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    मिसिर बेसरा गिरिडीह जिले में हुए सभी बड़े माओवादी कांड में मास्टरमाइंड था। करीब चालीस वर्ष पूर्व अपना गांव छोड़ कर माओवाद क्षेत्र में आया था । उस वक्त पीरतांड क्षेत्र में लालखंड की आग की लौ शुरू हो चुकी थी। लालखंड का भाकपा माओवादी संगठन में विलय का सूत्रधार भी था ।