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    गोड्डा के बदहाल स्कूल: 2 कमरे में ठूंसे जा रहे 248 बच्चे, बरामदे में लगती हैं कक्षाएं

    Updated: Wed, 22 Jul 2026 06:23 PM (IST)

    गोड्डा के पोड़ैयाहाट में कई स्कूल जर्जर हैं, जहां उत्क्रमित मध्य विद्यालय, खरकचिया में 248 बच्चे सिर्फ दो कमरों में पढ़ते हैं और कक्षाएं बरामदे में लग ...और पढ़ें

    बरामदे में पढ़ते छात्र। फोटो जागरण

    बरामदे में पढ़ते छात्र। फोटो जागरण

    HighLights

    1. पोड़ैयाहाट के खरकचिया स्कूल में 248 बच्चे दो कमरों में।

    2. जर्जर भवनों के कारण कक्षाएं बरामदे में संचालित होती हैं।

    3. गोड्डा के 39 में से 8 स्कूल अनुपयोगी घोषित, शिफ्ट किए गए।

    जागरण संवाददाता, पोड़ैयाहाट (गोड्डा)। पोड़ैयाहाट के कई स्कूल इन दिनों पूरी तरह जर्जर स्थिति में है। इनमें से आठ स्कूल भवनों को अब अयोग्य घोषित किया गया है। उसे दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कराया जा रहा है।

    जर्जर भवन वाले स्कूलों को अब नए भवन का इंतजार है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था यहां भगवान भरोसे ही चल रही है। ऐसे में यहां दो कमरे में 248 बच्चे ठूंसे जा रहे है। वहीं बरामदे में कक्षा लगती है।

    यह वाकया उत्क्रमित मध्य विद्यालय, खरकचिया का है। झारखंड गठन के करीब 26 वर्ष बाद भी सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का संकट खत्म नहीं हो सका है।

    शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के सरकारी दावों के बीच पोड़ैयाहाट प्रखंड के विद्यालयों की हकीकत बेहद चिंताजनक है। उत्क्रमित मध्य विद्यालय, खरकचिया इसका जीता-जागता उदाहरण है, जहां महज दो कमरों में 248 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई कराई जा रही है।

    जगह की कमी के कारण छोटे बच्चों की कक्षाएं बरामदे में संचालित होती हैं, जबकि विद्यालय का पुराना भवन जर्जर होने के कारण वर्षों पहले अनुपयोगी घोषित किया जा चुका है। बुधवार को विद्यालय में बच्चों की भीड़ के बीच हालात ऐसे रहे कि कई

    विद्यार्थियों को बरामदे में बैठाकर पढ़ाना पड़ा। प्रधानाध्यापक जयकांत ठाकुर ने बताया कि एक कमरे में कक्षा एक से पांच तक के 146 बच्चे, जबकि दूसरे कमरे में कक्षा छह से आठ तक के 102 छात्र-छात्राएं बैठते हैं। सभी बच्चों की उपस्थिति होने पर स्थिति और विकट हो जाती है। मजबूरी में पहली कक्षा के बच्चों को बाहर बैठाकर पढ़ाया जाता है।

    उन्होंने बताया कि विद्यालय में कक्षा एक में 17, दो में 32, तीन में 36, चार में 21, पांच में 40, छह में 30, सात में 33 तथा आठ में 37 विद्यार्थी नामांकित हैं। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को दो कमरों में पढ़ाना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बड़ी चुनौती है।

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    पुराना भवन बना खतरा, नया भी जर्जर होने लगा

    प्रधानाध्यापक ने बताया कि 1990 के दशक में बना विद्यालय भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। अभियंता और अंचलाधिकारी के निरीक्षण के बाद उसमें बच्चों को बैठाने पर रोक लगा दी गई। इसके बाद से वर्ष 2004-05 में बने भवन के दो कमरों में ही पूरे विद्यालय का संचालन किया जा रहा है।

    उन्होंने बताया कि वर्तमान भवन भी अब जर्जर होने लगा है। हाल ही में विकास मद से इसकी मरम्मत कराई गई है, जिससे फिलहाल काम चल रहा है। कई बार विभाग को लिखित रूप से नए भवन निर्माण की मांग भेजी गई, लेकिन अब तक कोई स्वीकृति नहीं मिली।

    शौचालय बेकार, छात्राओं को सबसे अधिक परेशानी

    विद्यालय का शौचालय भी उपयोग के योग्य नहीं है। सेप्टिक टैंक का ढक्कन टूटकर ध्वस्त हो चुका है और निर्माण में गुणवत्ता की कमी के कारण पूरी संरचना जर्जर हो गई है। परिणामस्वरूप शौचालय बंद पड़ा है। इसका सबसे अधिक असर छात्राओं पर पड़ रहा है, जिन्हें भारी असुविधा झेलनी पड़ रही है।

    पोड़ैयाहाट के आठ स्कूल पूरी तरह अनुपयोगी

    विभागीय सूत्रों के अनुसार गोड्डा जिले के 39 विद्यालय पूरी तरह जर्जर घोषित किए जा चुके हैं। इनमें पोड़ैयाहाट प्रखंड के आठ विद्यालय भी शामिल हैं। इनमें प्राथमिक विद्यालय अंबाडीहा, गौरीपुर, सतपहाड़ी, कमराडोल, उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय सिंदबांक मांझी टोला, छोटा राजदाहा, करमटोला तथा केलाबाड़ी रुसना टोला शामिल हैं। इन विद्यालयों को पूरी तरह अनुपयोगी घोषित कर निकटवर्ती विद्यालयों में शिफ्ट करने का निर्देश दिया गया है।

    जर्जर भवनों में बच्चों को बैठाने पर रोक लगा दी गई है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। पूर्ण रूप से अनुपयोगी विद्यालयों को निकटतम विद्यालयों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया है। भवन निर्माण के लिए विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। आवंटन मिलते ही नए भवनों का निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। - राजीव कनौजिया, कनीय अभियंता, शिक्षा विभाग।